मौके पर मौजूद जवान और अधिकारी ही किसी कार्रवाई के बारे सबसे सही निर्णय कर सकते हैं. उन्हें ‘आदेश’ की अनुपस्थिति को ‘निष्क्रियता’ की वजह नहीं बनने देना चाहिए.
जो भी सामाजिक नीति का पक्षधर है, उन्हें मांग करनी चाहिए कि 27 प्रतिशत आरक्षण को बांटने के बाबत बने रोहिणी आयोग की सिफारिशें सरकार महामारी के उतार के तुंरत बाद जारी करे.
इन दिनों यूपी में ब्राह्मण और ठाकुर आपसे में टकरा रहे हैं. सत्ता का अधिकतम लाभ पाने के लिए दोनों समुदायों में होड़ मची है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि इनमें से कोई बीजेपी को छोड़ देगा.
भारत में धर्मनिपेक्षता के पैरोकारों की चाहे जो भी गलतियां और नाकामियां रही हों, वे हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा के उत्कर्ष के मुख्य जिम्मेदार नहीं हैं. वास्तव में, इनमें से कुछ पैरोकार अगर राष्ट्रीय मंच पर न उभरते तो वह उत्कर्ष बहुत पहले हो गया होता.
भारतीय लोगों की कपोलकल्पनाओं ने विकास दुबे को बेवजह उत्तर प्रदेश का ‘डॉन’ बना दिया कि वह जिंदा गिरफ्तार होता तो सरकार के तख़्तापलट का भी वजह बन सकता था.
यदि भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय रोगियों के संपर्कों को ढूंढने और आइसोलेशन पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है तो उसके लिए कोविड-19 टेस्टिंग को पूरी तरह नियंत्रण मुक्त करना सबसे अच्छी नीति होगी.
तुर्की के सुप्रीम कोर्ट ने हागिया सोफिया म्यूजियम को मस्जिद बनाने के पक्ष में फैसला दे दिया है तो भारत में बाबरी मस्जिद बनाम राम मंदिर का मुद्दा और इससे जुड़ा अदालती फैसला फिर से बहस के केंद्र में आ गया है.
हमारे यहां नदियों की अपनी कोई जमीन ही नहीं है, ऐसा कोई नोटिफिकेशन नहीं जो बताता हो कि अमुक जमीन अमुक नदी की है. नदी पथ की जमीन या तो सरकार की होती है या निजी. तो पौधारोपण किस जमीन पर होगा ?
अमेरिका के लक्ष्य अधूरे रह गए, अब उसके पास न तो इतनी ताकत है और न इतना जोश है कि वह युद्ध फिर शुरू कर सके; और ईरान? घुटने टेकने की जगह वह पूरे संकल्प के साथ लड़ा. उसकी बागडोर अब ज्यादा कट्टरपंथी लोगों के हाथ में है