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Sunday, 19 April, 2026
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साल के अंत में राष्ट्रीय हित का कबूलनामा: फौज–इस्लाम का मेल लोकतंत्र को खत्म नहीं करता

इस साल मैंने नेशनल इंट्रेस्ट में जो लेख लिखे उनमें आपमें से कई को कुछ-न-कुछ गलत ज़रूर लगा होगा. मैं आपसे असहमत हो सकता हूं, लेकिन कुछ के लिए अपनी गलती कबूल करनी चाहिए. इस हफ्ते मैं उनमें से जो सबसे ताज़ा है उसकी बात करूंगा.

क्या उन्नाव केस में न्याय फिर 2018 वाली पटरी पर लौट गया? सेंगर के लिए ‘अधिकार’, पीड़िता के लिए ‘काल’

दिल्ली हाई कोर्ट ने न तो रेप पर सवाल उठाए और न ही उन अपराधों में कुलदीप सेंगर की दोषिता पर, जिनके लिए उसे सज़ा मिली है—इस वजह से उसकी सज़ा को निलंबित किया जाना और भी डरावना लगता है.

भारत में जलवायु संकट को ‘नॉर्मल’ मान लिया गया है, लेकिन कीमत देश के गरीब चुका रहे हैं

यह मान लेना कि अब चीज़ें ऐसी ही होंगी, चिंता की बात है. तापमान बढ़ेगा, पानी खत्म होगा, हवा दम घोंटने लगेगी और हम बस खुद को ढाल लेंगे.

अरावली को लेकर आर्थिक दिशा बदलने की ज़रूरत, खनन रोकें, इको-टूरिज़्म में निवेश बढ़ाएं

अगर हम सिर्फ यह सोचकर खुश हो जाएं कि सरकार को पीछे हटना पड़ा, तो हम एक खबर तो जीत लेंगे, लेकिन ज़मीन और पहाड़ खो देंगे.

अरावली ज़ोनिंग योजना को ताकतवर लोग आसानी से मोड़ सकते हैं, सरकार को डेटा पब्लिक करना चाहिए

शब्दों की ‘तकनीकी’ पुनर्परिभाषा एक खामी बन सकती है. निचली पहाड़ियां और उन्हें जोड़ने वाली संरचनाएं—जो अक्सर पारिस्थितिकी के लिहाज़ से बेहद अहम होती हैं, उनको गैरज़रूरी मानकर नज़रअंदाज किए जाने का खतरा है.

किसान आंदोलन और चुनावी राजनीति: चरण सिंह की लोक दल से क्या सबक

किसानों के आंदोलन की सफलता के बाद, 14 यूनियनें 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए संयुक्त समाज मोर्चा के तहत एक साथ आईं. हालांकि, वह एक भी सीट जीतने में नाकाम रहीं.

चरण सिंह ने सामूहिक खेती के सोवियत मॉडल की नाकामियों का खुलासा करके भारतीय कृषि को बचाया

‘संयुक्त खेती का एक्सरे...’ किताब में चरण सिंह ने ‘एफएओ’, ‘यूएसडीए’ और स्वतंत्र अखबारों से हासिल तथ्यों के साथ सिद्ध किया कि सामूहिक खेती हर जगह विफल रही थी.

अमेरिका में एप्स्टीन फाइल्स और एलीट के खिलाफ नाराज़गी

सभी शैक्षणिक संस्थानों में, हार्वर्ड—जो दुनिया का सबसे अमीर और शायद सबसे ताकतवर शैक्षणिक संस्थान है—वह जगह है जहां एपस्टीन के संबंध सबसे ज्यादा फलते-फूलते दिखते हैं.

भारत में इंसाफ का नया चेहरा: सेंगर, आसाराम, अखलाक के हत्यारों के लिए अलग कानून

ताकतवर लोगों या किसी खास विचारधारा की सेवा करने वालों के लिए नया नियम यह है: तो क्या हुआ अगर आप दोषी पाए गए और जेल भेजे गए? हम आपको तुरंत बाहर निकलवा लेंगे.

बोंडी बीच की गोलीबारी से लेकर बांग्लादेश लिंचिंग—असली वजह की फिर अनदेखी होगी

धर्म के नाम पर आतंक फैलाने वाले लोगों के खिलाफ आज शायद नैतिक ‘जिहाद’ की जरूरत आ पड़ी है.

मत-विमत

ईरान पर ट्रंप-नेतन्याहू का दांव: क्या फिर लौट रही है ‘रिजीम चेंज’ की नीति?

अमेरिका के लक्ष्य अधूरे रह गए, अब उसके पास न तो इतनी ताकत है और न इतना जोश है कि वह युद्ध फिर शुरू कर सके; और ईरान? घुटने टेकने की जगह वह पूरे संकल्प के साथ लड़ा. उसकी बागडोर अब ज्यादा कट्टरपंथी लोगों के हाथ में है

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राजनीति

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विपक्ष ने प्रधानमंत्री के संबोधन की आलोचना की

नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (भाषा) विपक्षी नेताओं ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देश के लिए संबोधन की आलोचना करते हुए इसे राजनीति...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.