अक्साई चीन पर कब्जे का सपना देखने की जगह भारत को एक स्पष्ट सोच अपनाने की जरूरत है कि वो कौन सी सीमाएं हैं जिनके लिए लड़ा जाना चाहिए और उन्हें बचाने के लिए किस चीज़ की जरूरत है.
मुस्लिमों पर उनकी यह तोहमत इस अर्थ में बेजा है कि इस भ्रांत धारणा पर आधारित है कि भाजपा को सत्ता से बेदखल करने की जिम्मेदारी सबसे ज्यादा मुस्लिमों की ही है और इसे निभाने के लिए उन्हें हर हाल में ‘अतिरिक्त समझदारी’ प्रदर्शित करनी ही चाहिए!
मणिपुर में एनपीपी से लेकर असम में बीपीएफ और अब बिहार में वीआईपी तक भाजपा ने सहयोगी दलों को गंवाने का ट्रैक रिकॉर्ड बना रखा है. और उसे इसकी कोई खास परवाह भी नहीं है.
बीजेपी ने जिस तरह से लाभार्थियों के मामले को चुनाव प्रचार में प्राथमिकता दी, बल्कि जिस तरह से इन योजनाओं को चलाया और चुनाव से पहले इन्हें लागू किया, उससे ये तो पता चलता ही है कि वो इन योजनाओं को कितनी गंभीरता से लेती है.
विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से हम अपनी परीक्षाएं डिज़ाइन करते हैं, उससे कोचिंग उद्योग को फलने-फूलने का मौक़ा मिलता है; NEET, JEE और अन्य दाख़िला परीक्षाओं में यही हुआ है.
संयुक्त राष्ट्र में भारत की गैरहाजिरी पर पश्चिमी देशों ने न सिर्फ उसकी आलोचना की बल्कि अनैतिकता को लेकर ताने भी कसे. लेकिन ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से हम भारतीय नीति को सिर्फ इसी संदर्भ में नहीं आंक सकते. और जो ऐसा करते हैं, उन्हें खुद अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए.
तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.