वी.पी. सिंह, लालकृष्ण आडवाणी हों या नरसिंह राव, वाजपेयी, यूपीए की सरकार, किसी ने कश्मीरी पंडितों के दर्द को नहीं समझा ‘कश्मीर फाइल्स’ ने उस भूल को ठीक करने की कोशिश की है.
सूबे के नये मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भगत सिंह की एक सजीली तस्वीर(इस तस्वीर के बगलगीर बाबा साहब आंबेडकर की तस्वीर भी थी) लगायी जिसमें भगत सिंह को बसंती पगड़ी पहने दिखाया गया है.
सोशल मीडिया पर निरंकुश तरीके से अपलोड होने वाली पोस्ट और वीडियो क्लिप समाज को ही नहीं बल्कि पारिवारिक और व्यक्तिगत रिश्तों में भी दरार पैदा करने लगा है.
दुर्गा भाभी ने एक बार पत्नी बनकर भगत सिंह को पुलिस से बचाया था. उन्हीं को लेकर भगत सिंह और उनके साथी सुखदेव में तनावपूर्ण संबंध भी पैदा होने के दावे किए जाते हैं.
पंजाब में ‘इंकलाब के चेहरे’ भगवंत मान के लिए चुनौतियों का अंबार लगा हुआ है, अगर वे दिल्ली में बैठे राजनीतिक आकाओं की मेहरबानी पर निर्भर नजर आएंगे तो पंजाबियों का विश्वास और सम्मान कभी नहीं हासिल कर पाएंगे.
सामाजिक न्याय यूपी में मुकाबले में था ही नहीं. कोई बड़ी पार्टी इस आधार पर वोट मांग ही नहीं रही थी. वह संघर्ष हो सकता है आगे चलकर हो लेकिन उससे पहले ही इसे हारा हुआ घोषित कर देना जल्दबाजी है.
तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.