गोहिल ने कहा कि जब तक उसके माता-पिता ने उन्हें मजबूर करना बंद नहीं किया, तब तक वह सदमे में रहे और उदास हो गया थे. वो अक्सर आत्महत्या के बारे में सोचता थे.
तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.