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Sunday, 19 April, 2026
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2019 का चुनाव सिर्फ मोदी को लेकर है, और भाजपा, संघ या विपक्ष तक चर्चा से बाहर हैं

ऐसा लगता है कि आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए मुख्य मुद्दा नरेंद्र मोदी बनाम अराजकता का है. पार्टी काफी अाक्रामक रूप से इस मुद्दे को आगे बढ़ा रही है.

क्या बीजेपी 2014 के अपने चुनावी घोषणा-पत्र पर अब बात करना चाहेगी

चुनाव सत्ताधारी दल के लिए अपने घोषणापत्र व पूरे किए वादों पर बात करने का एक मौका होता है. लेकिन बीजेपी इस बारे में बात क्यों नहीं कर रही है.

क्या भारतीय क्रिकेट के पहले सुपरस्टार पालवंकर बालू को जानते हैं?

रामचन्द्र गुहा का मानना है की भारतीय क्रिकेट के पहले महान और सुपरस्टार क्रिकेटर सीके नायडू नहीं, पालवंकर थे. लेकिन क्रिकेट इतिहासकारों ने उनकी अनदेखी कर दी.

अखिलेश यादव 2019 का चुनाव शुरू होने से पहले ही हार चुके हैं

सवाल ये है कि बसपा प्रमुख मायावती से गठबंधन कर अखिलेश यादव और सपा को क्या मिलेगा?

जीवन की सांझ में क्या मराठा साम्राज्य को बचा पाएंगे एनसीपी चीफ शरद पवार

रकांपा प्रमुख इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे. उन पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का जनाधार बचाने के साथ अपनी विश्वसनीयता बचाने की भी चुनौती है.

भीम आर्मी चीफ से मिलकर प्रियंका गांधी वाड्रा ने क्या हासिल किया?

क्या भीम आर्मी इतनी महत्वपूर्ण हो चुकी है कि देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी की एक प्रमुख नेता चुनाव के बीच में उसके मुखिया से मिलने जाए.

कर्ज़ में डूबे पाकिस्तान को तभी संकट से उबारना चाहिए, जब वह आतंकवाद के खिलाफ़ ठोस कदम उठाए

पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के 12 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज की तत्काल ज़रूरत है और यदि युद्ध को टालना है तो चीन के अलावा शेष प्रमुख ताक़तों को पाकिस्तान पर दबाव डालने के लिए इसका इस्तेमाल करना चाहिए.

लोकसभा चुनाव में जनता के बीच नहीं, फिल्मी परदे पर होगा प्रचार

जमाना बदल गया है और जमाने के साथ चुनाव प्रचार भी बदल गया है. पहले लोग चुनाव में उम्मीदवार उतारते थे. अब फिल्में भी उतारी जाती है.

खबरें अब हिंसक और जानलेवा हो गई हैं

आजकल संचार और संप्रेषण के चालाक औजार को राजनीति का एक अहम जरिया बना लिया गया है. इसका मुख्य इस्तेमाल हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है.

सरकारें कब तक बीएसएनएल जैसे उपक्रमों को दिवालिया होने से बचाती रहेंगी?

बीएसएनएल जैसी टेलीकॉम कंपनियां तन्ख्वाह नहीं दे पा रहीं. उनके लाभकारी बनने के कोई संकेत भी नहीं. इससे बचने का सही उपाय कंपनियों में पैसा डालने के बजाय, इसमें काम कर रहे लोगों को पैसा देकर विदा करना बेहतर उपाय है.

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ईरान पर ट्रंप-नेतन्याहू का दांव: क्या फिर लौट रही है ‘रिजीम चेंज’ की नीति?

अमेरिका के लक्ष्य अधूरे रह गए, अब उसके पास न तो इतनी ताकत है और न इतना जोश है कि वह युद्ध फिर शुरू कर सके; और ईरान? घुटने टेकने की जगह वह पूरे संकल्प के साथ लड़ा. उसकी बागडोर अब ज्यादा कट्टरपंथी लोगों के हाथ में है

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राजनीति

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विपक्ष ने प्रधानमंत्री के संबोधन की आलोचना की

नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (भाषा) विपक्षी नेताओं ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देश के लिए संबोधन की आलोचना करते हुए इसे राजनीति...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.