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Sunday, 26 April, 2026
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बजट 2019 आर्थिक सुधारों पर जोर देने वाला, लेकिन संरक्षणवादी है

वित्तीय मजबूती बनाए रखने के नरेंद्र मोदी सरकार के रेकार्ड को कायम रखने के साथ ही राजस्व बढ़ाने के उसके प्रयासों को मजबूती देने के कई उपाय किए गए हैं.

मोदी सरकार के नए बजट में भारत के सामाजिक क्षेत्र के लिए कोई साफ नजरिया नहीं

बजट मोदी सरकार के पुराने अवतार में लौट आया है. बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करने और जल संकट की समस्या का जिक्र करना शामिल है.

भारत का मिडिल क्लास मोदी के लिए ‘मुसलमान’ क्यों है

प्रधानमंत्री मोदी मध्यवर्ग से पैसा लेकर गरीबों को दे रहे हैं क्योंकि उन्हें भरोसा है कि यह वर्ग राष्ट्रवाद और मुसलमानों के प्रति अपनी नापसंदगी के कारण वैसे भी उन्हें वोट देगा ही.

‘वह गुस्सा था जिसकी वजह से मैंने आर्टिकल 15 लिखी, प्लॉट तो साधनमात्र है’

इस फिल्म को दर्शकों का भी ढेर सारा प्यार मिला है और बॉक्स ऑफीस पर इसे शानदार सफलता मिल रही है. यह मेरे लिए एक अचरज की बात है.

क्या अखिलेश यादव सैफई साम्राज्य के आखिरी सुल्तान साबित होंगे?

अखिलेश यादव में क्या वह जज्बा है कि वे बीजेपी के हमलों से समाजवादी पार्टी को बचा ले जाएंगे? क्या उनमें अपने पिता की तरह जमीनी राजनीति करने का माद्दा है? वे मुलायम सिंह क्यों नहीं बन पा रहे हैं?

सिंहासन या राहुल गांधी की चरण पादुका, कांग्रेस के नए अध्यक्ष को क्या मिलेगा?

ये मानना भूल होगी कि एक सदी से भी अधिक पुरानी कांग्रेस नेतृत्व परिवर्तन मात्र से युवा बन जाएगी.

निर्मला सीतारमण का पहला बजट कैसा होगा, इसका सुराग भाजपा के घोषणापत्र में है

मोदी जब 2014 में सत्ता में आए थे, तो अरुण जेटली के पहले बजट में भाजपा के घोषणापत्र के वादे प्रतिबिंबित हुए थे. इस बार भी वैसा ही होने की उम्मीद है.

वामपंथ नहीं रहा लेकिन देश में नये सोच के ‘नव-वाम’ की जरूरत बरकरार

वामपंथ हमारे सार्वजनिक जीवन से गायब हो जाये तो यह बड़ा त्रासद कहलायेगा. वामपंथ की नाकामियां अपनी जगह लेकिन वामपंथ ने भारतीय लोकतंत्र के जनतांत्रिक चरित्र को बनाये ऱखने में अहम भूमिका निभायी है.

लेफ्ट मॉडल की हूबहू नकल ममता बनर्जी की सबसे बड़ी नाकामी रही है

दीदी जो भी कर लें, अब उनके लिए कुछ भी कारगर साबित नहीं होता दिखता. क्या 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के परिणाम तय भी हो चुके हैं?

कांग्रेस का मृत्युलेख लिखने की जल्दबाजी न करें

कांग्रेस की वापसी संभव है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि वह आत्म मंथन करें, हार के कारणों में जाये, ईमानदारी से उनका निवारण करे तथा पूरे आत्म विश्वास के साथ जनता के बीच जाये.

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राइटिंग्स ऑन दि वॉल—नक्सलबाड़ी की क्रांति से ‘विनर्स’ तक: बंगाल की नई इबारत

पश्चिम बंगाल चुनाव में वामपंथी दल और कांग्रेस खुरचन में हिस्सेदारी के लिए होड़ लगा रहे हैं. पूर्वी-मध्य भारत में माओवाद को कब्र में दफन कर दिया गया है, तो केरल में वे सरकार विरोधी दोहरी भावना से जूझ रहे हैं.

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झारखंड एटीएस ने देवघर से तीन लोगों को गिरफ्तार किया, अमेरिका निर्मित पिस्तौल जब्त

देवघर, 25 अप्रैल (भाषा) झारखंड के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने देवघर से तीन लोगों को गिरफ्तार कर उनके पास से अमेरिका निर्मित एक...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.