प्रधानमंत्री मोदी मध्यवर्ग से पैसा लेकर गरीबों को दे रहे हैं क्योंकि उन्हें भरोसा है कि यह वर्ग राष्ट्रवाद और मुसलमानों के प्रति अपनी नापसंदगी के कारण वैसे भी उन्हें वोट देगा ही.
अखिलेश यादव में क्या वह जज्बा है कि वे बीजेपी के हमलों से समाजवादी पार्टी को बचा ले जाएंगे? क्या उनमें अपने पिता की तरह जमीनी राजनीति करने का माद्दा है? वे मुलायम सिंह क्यों नहीं बन पा रहे हैं?
वामपंथ हमारे सार्वजनिक जीवन से गायब हो जाये तो यह बड़ा त्रासद कहलायेगा. वामपंथ की नाकामियां अपनी जगह लेकिन वामपंथ ने भारतीय लोकतंत्र के जनतांत्रिक चरित्र को बनाये ऱखने में अहम भूमिका निभायी है.
कांग्रेस की वापसी संभव है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि वह आत्म मंथन करें, हार के कारणों में जाये, ईमानदारी से उनका निवारण करे तथा पूरे आत्म विश्वास के साथ जनता के बीच जाये.
पश्चिम बंगाल चुनाव में वामपंथी दल और कांग्रेस खुरचन में हिस्सेदारी के लिए होड़ लगा रहे हैं. पूर्वी-मध्य भारत में माओवाद को कब्र में दफन कर दिया गया है, तो केरल में वे सरकार विरोधी दोहरी भावना से जूझ रहे हैं.