Wednesday, 17 August, 2022
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निर्मला सीतारमण का पहला बजट कैसा होगा, इसका सुराग भाजपा के घोषणापत्र में है

मोदी जब 2014 में सत्ता में आए थे, तो अरुण जेटली के पहले बजट में भाजपा के घोषणापत्र के वादे प्रतिबिंबित हुए थे. इस बार भी वैसा ही होने की उम्मीद है.

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जब नरेंद्र मोदी की अगुआई में भाजपा ने 2014 की गर्मियों में सत्ता हासिल की और कुछ ही हफ्ते बाद अपना पहला बजट पेश किया, तो उसमें पार्टी के चुनाव घोषणापत्र के वादों की छवि देखी जा सकती थी. इसलिए, आश्चर्य नहीं कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले बजट में भाजपा के 2019 के चुनाव घोषणापत्र या संकल्प पत्र के वादे प्रतिबिंबित हों, और किसानों के लिए कार्यक्रमों, नल जल योजना, सब के लिए आवास तथा व्यापारियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं पर ज़ोर दिया जाए.

भारत में हाल के दशकों की सार्वजनिक व्यय की परंपरा के अनुरूप, इनमें से कतिपय योजनाओं के लिए शुरू में कम राशि आवंटित की जा सकती है, और फिर अगले पांच वर्षों के दौरान सफल योजनाओं के लिए आवंटन बढ़ाया जा सकता है. संभव है बाकी योजनाएं या तो चल ही ना पाएं, या छोटे स्तर पर कार्यान्वित होती रहें. छोटी योजनाएं पायलट स्कीम जैसी होती हैं, जबकि बड़े स्तर पर किसी योजना की घोषणा कार्यान्यवयन, लोकप्रियता, राजनीतिक निहितार्थ और बजटीय आवंटन जैसे कारकों पर निर्भर करती है. पायलट योजना चलाने वाली टीम को पहले खुद को सफल सिद्ध करना होता है, तभी संबंधित योजना को बड़े स्तर पर लागू किया जाता है.


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अपर्याप्त कर राजस्व, पहले से निर्धारित व्यय, और बड़े राजकोषीय घाटे के विकल्प में अंतर्निहित जोखिमों के कारण सरकार के हाथ तंग हैं. इसलिए नई योजनाओं को कम धन के सहारे शुरू करने का कदम व्यावहारिक है. इससे राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण रखने के साथ-साथ चुनावी वादों को पूरा करना भी संभव होगा.

2014 से 2019 तक साधारण निवेश से नई योजनाएं आरंभ करने, राजकोषीय सुदृढ़ता बरकरार रखने, और सफल योजनाओं के लिए आवंटन बढ़ाने के इसी द्विस्तरीय तरीके को अमल में लाया गया है. कुछ अपवादों को छोड़ दें तो पिछले वित्त मंत्री अरुण जेटली के सभी बजटों में राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के प्रयास किए गए थे.

एनडीए के पहले बजट में दिखा था बदलाव

यूपीए काल में, केंद्र सरकार की योजनाओं की संख्या कम कर दी गई थीं, और बड़े बजटीय आवंटन के साथ विशाल परिव्यय वाली कुछेक योजनाओं को लागू किया गया था. भोजन, रोज़गार, शिक्षा आदि के कानूनी अधिकार से संबद्ध योजनाओं के लिए हज़ारों करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे. लेकिन भारी मात्रा में अपव्यय के कारण इन योजनाओं का प्रभाव सीमित रहा और इनको लेकर भारी असंतोष की स्थिति रही.

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एनडीए की सरकार आने के बाद जुलाई 2014 के बजट में योजनाओं के लिए धन आवंटन का यूपीए से बहुत अलग तरीका अपनाया गया. नमामी गंगे, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मूल्य स्थिरीकरण कोष, करियर केंद्र, सुशासन, राष्ट्रीय ग्रामीण इंटरनेट एवं टेक्नोलॉजी मिशन, वस्त्र मेगाक्लस्टर, वॉर मेमोरियल, घाट विकास, कम लागत के सस्ते आवास संबंधी मिशन, ग्रामीण आवास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, स्मार्ट सिटी योजना, स्टार्ट-अप विलेज उद्यमिता, यंग लीडर्स कार्यक्रम, मोबाइल मृदा परीक्षण प्रयोगशाला, राष्ट्रीय अनुकूलन निधि, किसान टीवी, राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा, नए एम्स, कृषि उद्योग प्रौद्योगिकी केंद्रों का नेटवर्क, कोयला आधारित अति उन्नत विद्युत प्रौद्योगिकी, राष्ट्रीय विरासत विकास एवं संवर्धन योजना (हृदय) तथा तीर्थयात्रा स्थल कायाकल्प एवं आध्यात्मिक विकास कार्यक्रम राष्ट्रीय मिशन (प्रसाद) जैसी नई योजनाओं की शुरुआत कर भाजपा के चुनावी घोषणापत्र के कई वादों को पूरा करने के प्रयास किए गए.

इसीलिए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित होने वाली योजनाओं की पूर्व जानकारी पाने के लिए हमें भाजपा के 2019 के घोषणापत्र को टटोलना चाहिए. प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणापत्र की भूमिका में दो वादों पर खास ज़ोर भी दिया है- किसानों की आय को दुगुना करना और 2022 तक सबके लिए आवास. बजट 2019 में इनसे जुड़ी पहलकदमियों को स्थान मिलने की संभावना है. साथ ही, जल शक्ति या नल से पानी की आपूर्ति, और खुदरा व्यापारियों के लिए ऋण से जुड़ी योजनाओं की घोषणा की जा सकती है.

घोषणा-पत्र में शामिल वादे

भाजपा के संकल्प पत्र में ये वादे किए गए थे:

60 वर्ष की आयु के छोटे और सीमांत किसानों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पेंशन.

ब्याज -मुक्त किसान क्रेडिट कार्ड ऋण, जिसके तहत मूल राशि के त्वरित पुनर्भुगतान की शर्त पर 1 से 5 वर्षों के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर 1 लाख रुपये तक के नए कृषि ऋण की व्यवस्था होगी.

तिलहन और अन्य कृषि उत्पादों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए एक नया तिलहन मिशन.

कृषि उपज के कुशल भंडारण और उससे संबंधित परिवहन तंत्र बनाने के लिए एक राष्ट्रीय वेयरहाउस ग्रिड.

किसानों को उनके गांवों के पास कृषि उपज भंडारण की सुविधा देने और उचित समय पर लाभप्रद मूल्य पर बेचने में सक्षम बनाने के लिए एक नई ग्राम भंडारण योजना; साथ ही कृषि उपज भंडारण रसीद के आधार पर किसानों को सस्ते ऋण की एक पूरक योजना.

किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी सुनिश्चित करने के वास्ते एक राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और हनी मिशन.

एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर 100 प्रतिशत सिंचाई क्षमता हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना का विस्तार. इसके अंतर्गत एक करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि को सूक्ष्म सिंचाई कार्यक्रम के तहत लाने, और साथ ही उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के लिए ‘फर्टिगेशन’ तकनीक के प्रसार की योजना.

देसी प्रजातियों के मवेशियों के संरक्षण के लिए स्थापित कामधेनु आयोग के उद्देश्यों के अनुरूप, किसानों को उनके दरवाजे पर जाकर सेवा प्रदान करने हेतु मोबाइल पशु चिकित्सा औषधालयों के नेटवर्क की स्थापना.

चारे की कमी को दूर करने के लिए एक राष्ट्रीय पशुआहार और चारा मिशन.

2022 तक सभी के लिए आवास, यानि जिन परिवारों अपना खुद का घर नहीं है या जो कच्चे घरों में रहते हैं उनके लिए पक्के आवास.

‘जल जीवन मिशन’ की शुरुआत, जिसके तहत 2024 तक हर घर में पाइप से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम ‘नल से जल’ शुरू किया जाएगा.

छोटे और पारंपरिक मछुआरों को भंडारण और मार्केटिंग के साधन उपलब्ध कराने, तथा आइस-बॉक्स, कोल्ड स्टोरेज, बर्फ निर्माण संयंत्र जैसे बुनियादी ढाँचे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के आवंटन से ‘मत्स्य संपदा योजना’ की शुरुआत.

एक नए राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड की स्थापना, और खुदरा व्यापार के विकास के लिए राष्ट्रीय खुदरा व्यापार नीति का निर्माण.

छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए जीएसटी पंजीकृत सभी व्यापारियों के लिए 10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा.

किसान क्रेडिट कार्ड की तर्ज पर व्यापारी क्रेडिट कार्ड योजना.

सभी छोटे दुकानदारों को शामिल करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना का विस्तार.

(यह खबर अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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