पूर्व केंद्रीय मंत्री, जिन्होंने चिंतन शिविर में हिस्सा नहीं लिया था, 16 मई को कांग्रेस को भी अलविदा कह दिया. जी-23 नेताओं में से एक कपिल सिब्बल 2020 से कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ आवाज़ उठाते रहे हैं.
कांग्रेस को उम्मीद है कि 1 जून को लांच हो रहे सत्याग्रह ऐप के जरिए वह जल्द ही चुनाव में जाने वाले गुजरात में 1 करोड़ घरों तक पहुंच बना पायेगी. इसके उद्देश्यों में आदिवासी मुद्दों की बेहतर समझ भी शामिल है.
सिब्बल ने नामांकन भरने के बाद कहा, 'अब मैं कांग्रेस का नेता नहीं हूं. मैंने स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर नामांकन भरा है. मैं हमेशा से देश में एक स्वतंत्र आवाज बनना चाहता रहा हूं.'
अदालत में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान की पैरवी करने वाले वकील कपिल सिब्बल का राज्य सभा कार्यकाल जुलाई में खत्म हो रहा है. सिब्बल को कांग्रेस के भीतर सुधार की मांग उठाने वाले पार्टी नेताओं में से एक माना जाता है.
'चिंतन शिविर' में किए गए वादों के उलट ये नया ग्रुप कोई बड़ा बदलाव करता नजर नहीं आ रहा है. पैनल में शामिल किए गए ज्यादातर चेहरे या तो पुराने हैं या वे गांधी परिवार के करीबी माने जाते हैं.
राजनीतिक नेतृत्व ने 1971 की तरह 2020 में भी सैन्य मामलों में दखल न देकर सही राजनीतिक निर्देश जारी किया, और रक्षा मंत्री ने सेना अध्यक्ष को सलाह दी कि 'जो उचित समझो वो करो.'