Sunday, 26 June, 2022
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कपिल सिब्बल को सपा की तरफ से राज्य सभा भेजने की अटकलों पर आजम खान बोले- यह उनका अधिकार है

अदालत में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान की पैरवी करने वाले वकील कपिल सिब्बल का राज्य सभा कार्यकाल जुलाई में खत्म हो रहा है. सिब्बल को कांग्रेस के भीतर सुधार की मांग उठाने वाले पार्टी नेताओं में से एक माना जाता है.

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लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) नेता आजम खान ने मंगलवार 24 मई को लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘राज्य सभा के लिए मनोनीत होना कपिल सिब्बल का ‘अधिकार’ है और ऐसा करना किसी भी राजनीतिक दल के लिए सम्मान की बात होगी.’

आजम खान की यह टिप्पणी लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में जारी ऐसी अटकलों के बीच आई है कि सपा की तरफ से सिब्बल को राज्य सभा के लिए नामित करने पर विचार किया जा रहा है. सिब्बल कांग्रेस के उन नेताओं में शुमार हैं, जो पार्टी नेतृत्व से सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं. माना जाता है कि उन्हें तभी से पार्टी में दरकिनार कर दिया गया है. उनका राज्य सभा का कार्यकाल जुलाई में समाप्त हो रहा है.

कथित तौर पर भूमि-हथियाने सहित कई मामलों को लेकर 27 महीने जेल में रहने के बाद आजम खान को 20 मई को उत्तर प्रदेश की सीतापुर जेल से अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था. सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में खान के वकील हैं.

खान ने कहा, ‘(सिब्बल) इतने वरिष्ठ व्यक्ति हैं, वह बहुत बड़े व्यक्ति हैं और बहुत अच्छे हैं. मुझे सबसे ज्यादा खुशी होगी अगर वह (नॉमिनेटेड) हैं.’

दिप्रिंट ने फोन पर सिब्बल से संपर्क साधा लेकिन कांग्रेस नेता ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

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हालांकि, एक वरिष्ठ सपा नेता ने नाम न छापने की शर्त पर दिप्रिंट को बताया कि निश्चित तौर पर संसद के उच्च सदन में नामांकन के लिए जिन नामों पर चर्चा चल रही है, उसमें सिब्बल भी शामिल हैं.

2016 में सिब्बल सपा के समर्थन से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में उत्तर प्रदेश से राज्य सभा के लिए चुने गए थे. हालांकि, कांग्रेस के अब राज्य में केवल दो विधायक ही रह गए हैं, वह यूपी से किसी को भी चुनने की स्थिति में नहीं है, जहां 11 राज्य सभा सीटें जल्द खाली होने वाली हैं.

भाजपा अपने बहुमत के दम पर सात सीटें जीत सकती है, जबकि सपा तीन सीटें जीत सकती है. यदि भाजपा आठवें उम्मीदवार को मैदान में उतारती है तो चुनाव कराने की स्थिति आएगी.

इस बारे में प्रतिक्रिया मांगने पर, सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने दिप्रिंट से कहा कि असली तस्वीर ‘कल तक (25 मई)’ स्पष्ट हो जाएगी.


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बदला नजरिया

आजम के अपनी पार्टी के साथ रिश्ते पहले की तरह मधुर नहीं रहे हैं.

आजम खान के जेल से रिहा होने से पहले उनके सहयोगियों ने सार्वजनिक तौर पर सपा के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की थी. खान के प्रवक्ता फसाहत अली खान ने कहा था कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव जेल में केवल एक बार आजम खान से मिलने पहुंचे थे और पार्टी ने पिछले ढाई साल में उन्हें रिहा कराने के लिए कोई प्रयास नहीं किया.

आजम खान ने सीतापुर जेल में उनसे मिलने का प्रयास करने वाले पार्टी विधायक रविदास मेहरोत्रा के नेतृत्व वाले सपा प्रतिनिधिमंडल से मिलने से भी इनकार कर दिया था, जबकि उन्होंने अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव— जिनके साथ पूर्व मुख्यमंत्री के रिश्ते तनावपूर्ण हैं और कांग्रेस नेता प्रमोद कृष्णम से मुलाकात की थी.

हालांकि, चौधरी के मुताबिक, सपा नेतृत्व के प्रति आजम खान की नाराजगी की खबरें मीडिया की देन हैं. ‘ऐसा कुछ भी नहीं है. मीडियाकर्मी ऐसी बातें पूछते रहते हैं और यह उनकी दिमागी उपज है.’

आजम खान ने इस बात से इनकार किया है कि सिब्बल का संभावित नामांकन उनकी नाराजगी दूर करने का सपा का एक प्रयास हो सकता है. उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘नहीं, नहीं. मैं, एक बीमार, कमजोर व्यक्ति हूं, देश का नंबर-1 माफिया हूं, जिसके खिलाफ सैकड़ों-हजारों मामले दर्ज हैं. मैं तो उनसे नाराज होने की स्थिति में ही नहीं हूं.’

उन्होंने शिवपाल यादव और सपा के साथ अपने रिश्तों पर भी चर्चा की. उन्होंने कहा, ‘मैंने उनसे (शिवपाल) पहले भी बात की है और आगे भी उनसे मिलूंगा. और सिर्फ वह ही क्यों? मैं किसी से भी मिल सकता हूं. अब तक मैंने अपनी पूरी जिंदगी में एक रेखा खींचकर रखी थी, किसी दूसरी नाव (राजनीतिक संगठन) पर चढ़ना तो दूर, उसकी तरफ देखा तक नहीं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन मैंने महसूस किया कि दुआ-सलाम तो सभी के साथ होना जाना चाहिए. साथ चाय-नाश्ता करने में भी कोई बुराई नहीं है. जब सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को यह अधिकार है कि वे एक-दूसरे से मिलें, कुछ चाय-नाश्ता करें, विवाह समारोहों में शामिल हों और अच्छे-बुरे समय में एक-दूसरे के काम आए तो मैं भी ऐसा कर सकता हूं. मैं भी उनकी तरह एक इंसान ही हूं.’

यह पूछे जाने पर कि क्या वह वास्तव में ‘दूसरी नाव की तरफ देखेंगे’, उन्होंने कहा, ‘पहले कोई मकूल कश्ती सामने तो आए, अभी तो मेरा जहां ही काफी है.’

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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