पार्टी ने 52 नए चेहरों को चुनाव मैदान में उतारा है. उनके मुताबिक 189 उम्मीदवारों की सूची में 32 अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से हैं जबकि 30 अनुसूचित जाति और 16 अनुसूचित जनजाति वर्ग से हैं.
कांग्रेस नेता और वायनाड के पूर्व सांसद राहुल गांधी ने कहा कि वह देश के लिए भाजपा से लड़ना जारी रखेंगे, और पीएम मोदी-अडाणी के रिश्ते पर सवाल पूछते रहेंगे.
गृहमंत्री और भाजपा नेता ने कहा कि, 'राहुल बाबा अभी भी समझ जाओ, अभी नॉर्थ ईस्ट में सूपड़ा साफ हुआ है, यही रास्ते पर चले तो देशभर में सूपड़ा साफ हो जाएगा.'
पाटिल ने कहा कि लगता है कि आप फ्रीबी स्कीमें उनके लिए काम कीं. वे इनका विभिन्न चुनावों में ऐलान किए और खुद को राष्ट्रीय पार्टी के रूप में पेश किया. लेकिन एनसीपी में हम ऐसा नहीं करते. यह राज्य के लिए संभव और अफोर्डेबल नहीं है.
एक अंग्रेजी अखबार में लिखे अपने संपादकीय में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र की बीजेपी सरकार पर जमकर निशाना साधा. सोनिया ने केंद्र सरकार पर विपक्ष को परेशान करने, लोकतंत्र को कमजोर करने और मीडिया की आज़ादी को खत्म करने का आरोप लगाया.
सोमवार को जारी आदेश में आयोग ने कहा कि NCP और टीएमसी को हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में उनके प्रदर्शन के आधार पर क्रमशः नगालैंड और मेघालय में राज्य स्तर के दलों के रूप में मान्यता दी जाएगी.
अडाणी के लिए एनसीपी प्रमुख शरद पवार के ‘समर्थन’ ने सहयोगी दल कांग्रेस की उलझनें बढ़ा दी हैं, लेकिन ऐसा कोई पहली बार नहीं हुआ है. पवार-अडाणी के संबंध वर्षों पुराने हैं और इसे लेकर पहले भी टकराव हुआ है.
यह अनशन कांग्रेस को पार्टी को भी विधानसभा चुनाव में बड़ा नुकसान पहुंचाएगा. इसलिए कांग्रेस पार्टी ने पायलट को इस अनशन को रोकने के लिए सख्त हिदायत दे दी है.
गृहमंत्री ने कहा, '2014 के पहले, पूरा नॉर्थईस्ट अशांत क्षेत्र के रूप में जाना जाता था लेकिन पिछले 9 साल में पीएम मोदी की 'लुक ईस्ट' नीति के कारण नॉर्थईस्ट क्षेत्र अब देश के विकास में योगदान देने वाला माना जाता है.'
2018 में कांग्रेस ने पांच हज़ार मतों के अंतर से 30 में से 18 सीटें जीतीं. वहीं, बीजेपी ने 8 और जेडी (एस) ने 3 सीटें जीतीं थीं. छोटे दलों की एंट्री और लिंगायत फैक्टर भी यहां हार-जीत में भूमिका तय कर सकते हैं.
तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.