भाजपा ने चुनाव आयोग से तिथि में बदलाव की मांग की है, क्योंकि उसे चिंता है कि 1 अक्टूबर के आसपास की छुट्टियां मतदान पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं. कांग्रेस का कहना है कि उसे ‘पूर्व-घोषित तिथियों से कोई समस्या नहीं है’.
दिप्रिंट को दिए एक विशेष इंटरव्यू में सिन्हा ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर में मानसिकता बदल गई है क्योंकि लोग अपना भविष्य एक अराजक पाकिस्तान के बजाय एक उत्साही भारत में देख रहे हैं.
राजस्थान भाजपा के असंतुष्ट नेता ने पहले भी लोकसभा चुनाव में हार के बाद अपने रुख के साथ-साथ राज्य में कथित भ्रष्टाचार को उजागर करके पार्टी को शर्मसार किया है.
यह 31 अगस्त से 2 सितंबर तक भाजपा और अन्य सहयोगियों के साथ वार्षिक आरएसएस समन्वय बैठक से पहले हुआ है. नए चुनावी चेहरे चुनने और वोटों के लिए 'मोदी फैक्टर' पर निर्भर न रहने पर भी चर्चा हुई.
सीबीआई द्वारा ट्रेनी डॉक्टर के बलात्कार-हत्या मामले की जांच किए जाने के बाद, टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. आलोचना के स्वर अब पश्चिम बंगाल और मेडिकल समुदाय तक सीमित नहीं रह गए हैं.
उनके करीबी सहयोगियों का कहना है कि चंपई अपने समर्थकों से अगले कदम के बारे में सलाह-मशविरा कर रहे हैं. उनमें से कई चाहते हैं कि वे एक पार्टी बनाएं, लेकिन कुछ लोग उन्हें एक स्थापित पार्टी में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.
तिरुवनंतपुरम के सांसद की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उनकी पार्टी इस योजना की प्रमुख आलोचक बन गई है, यहां तक कि एनडीए के भीतर भी कुछ लोगों ने इसके जरिए से की जाने वाली नियुक्तियों में आरक्षण की कमी के लिए इसकी आलोचना की है.
महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनावों में एक बार फिर पवार बनाम पवार की टक्कर देखने को मिल सकती है, जिसमें जय के अपने चचेरे भाई युगेंद्र के खिलाफ बारामती में चुनाव लड़ने की उम्मीद है, जो अजित के छोटे भाई का बेटा है.
चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की तारीखों की घोषणा के तुरंत बाद, जेजेपी को लगातार 4 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया, जिसमें उकलाना विधायक अनूप धानक का इस्तीफा भी शामिल है. तीन अन्य पहले ही पार्टी से खुद को अलग कर चुके हैं.
SC/ST कॉलोनियों और गांवों में ‘सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने’ की VHP की योजना है. पिछले चुनाव में 77 सीटों की तुलना में इस बार BJP को लोकसभा के लिए आरक्षित 131 SC/ST सीटों में सिर्फ 54 पर जीत मिली.
तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.