अगर कोई सरकार जानती है कि अमीरों को कैसे एकजुट किया जाए और उसने यह पता लगा लिया है कि सीधे पैसे भेजने से गरीबों के वोट कैसे जीते जाएं, तो उसे मध्यम वर्ग की कोई ज़रूरत नहीं है.
शिंदे ने जनता की अदालत में असली शिवसेना के लिए लड़ाई जीत ली है और अविभाजित शिवसेना के 2019 के प्रदर्शन को बेहतर बनाया है, लेकिन ऐसा लगता है कि वे सीएम पद की दौड़ हार गए हैं.
अब समझदार, उदारवादी आवाज़ों पर निर्भर है कि वह इस विभाजनकारी बयानबाजी से ऊपर उठें और सच्चाई और सुलह के रास्ते पर चलें, जो पुराने जख़्मों को कुरेदने के बगैर मरहम तक जाता हो.
आपने मुद्दे की बात की है. सरकार नियमित कर्मचारियों की जगह कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को छुट्टी आदि के प्रावधानों के साथ बहाली करके लागत काफी घटा सकती है, लेकिन क्या हम चुनावों, जनगणना, राहत तथा आपदा प्रबंधन के काम को ठेके पर करवा सकते हैं.
भारतीय राजनीति का भविष्य अब राज्य-केंद्रित समीकरणों के मुताबिक, खुद को ढालने और मतदाताओं के साथ निरंतर करीबी संपर्क बनाए रखने की राजनीतिक दलों की क्षमता पर निर्भर करेगा.
पश्चिम बंगाल चुनाव में वामपंथी दल और कांग्रेस खुरचन में हिस्सेदारी के लिए होड़ लगा रहे हैं. पूर्वी-मध्य भारत में माओवाद को कब्र में दफन कर दिया गया है, तो केरल में वे सरकार विरोधी दोहरी भावना से जूझ रहे हैं.