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Wednesday, 25 February, 2026
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डिजिटलीकरण में जिसने आलस किया वह पीछे छूट जाएगा

भारत में इंटरनेट के ग्राहकों की संख्या 56 करोड़ हो गई है और 2018 में यहां 12.3 अरब ऐप डाउनलोड किए गए. दुनिया में केवल चीन ही इस मामले में उससे आगे है.

उदित राज की बीजेपी से विदाई है संघ के समरसता प्रोजेक्ट की असफलता

पिछले कुछ दिनों से लग रहे क़यासों को सही साबित हुए, डॉ उदित राज ने आख़िरकार बीजेपी को छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन कर लिया है. उन्होंने उत्तर-पश्चिमी दिल्ली से अपना टिकट कटने की वजह से बीजेपी छोड़ दी है.

बेगूसराय में जावेद अख्तर ने क्यों किया आरजेडी उम्मीदवार तनवीर हसन का विरोध

बिहार के चुनावी समर में बेगूसराय सिर्फ एक सीट है. लेकिन यहां कन्हैया के खड़े होने और उनके पक्ष में देशभर से प्रगतिशील लोगों के जमा होने से इसे बहुत ज़्यादा मीडिया कवरेज मिल रही है. वहां जावेद अख्तर के एक बयान से विवाद हो गया है.

तो 40 साल बाद मिल सकता है दिल्ली को दूसरा सिख सांसद?

दिल्ली सरकार में मंत्री रहे अरविंदर सिंह लवली को कांग्रेस ने ईस्ट दिल्ली सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है. 1980 में चरणजीत सिंह बने थे दक्षिणी दिल्ली से सांसद.

क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी और अभिनेता अक्षय, दोनों हकीकत से दूर फिल्मी दुनिया में रहते हैं

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के मुखिया राजीव रंजन मिश्र का मातृ सदन जाने का हर्गिज यह मतलब नहीं कि सरकार आत्मबोधानंद से बात कर रही है.

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर दिग्विजय सिंह के लिए वरदान समान

अक्सर कांग्रेस का ‘मुस्लिम चेहरा’ बताए जाने वाले दिग्विजय सिंह अपनी छवि सुधारने और भोपाल के मुकाबले को ‘हिंदू धर्म बनाम हिंदुत्व’ का रूप देने के लिए प्रयासरत हैं.

बीजेपी को उदित राज, सावित्रीबाई फुले, उपेंद्र कुशवाहा, लक्ष्मीनारायण यादव जैसे नेता क्यों नहीं चाहिए?

बीजेपी का पूरा ध्यान इस समय सवर्ण वोटरों को इकट्ठा करने पर है, उनके लिए सवर्ण आरक्षण लाया गया है. उदित राज और उन जैसे लोग उसके इस प्रोजेक्ट में समस्या पैदा कर रहे थे.

उत्तर भारत में बन रही सामाजिक एकता से पूरा होगा कांशीराम का सपना

राजनीति आम तौर पर तोड़ती है. विभाजन पैदा करती है. लेकिन इस बार उत्तर भारत में खासकर बिहार और यूपी में समाज के वंचित समूहों ने जो एकता बनाई है, उसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं.

जी.डी बख्शी प्रकरण उदारवादियों के पाखंड और चुनिंदा आक्रोश को दर्शाता है

जब उदारवादियों के पाखंड को उजागर किया जाता है, तो वे उत्पीड़ित होने के उबाऊ रुदन में लग जाते हैं.

एक चुनाव से दूसरे चुनाव के बीच इतने अमीर कैसे हो जाते हैं नेता?

सांसद और विधायक अपना वेतन खुद तय करते हैं और बिना किसी बहस के अपना वेतन बढ़ा लेते हैं. इस मायने में राजनीति एक अच्छा व्यवसाय या कमाऊ खेती भी है. अब वह सिर्फ सेवा भाव के लिए नहीं की जा रही है

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मुसलमानों को ‘गोली मारने’ वाले हिमंत बिस्वा सरमा के वीडियो पर कानून क्या कहता है

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण चुनाव जीतने की संभावना बढ़ाने के लिए किया गया लगता है, लेकिन एक बड़ा कानूनी सवाल है: क्या इससे उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है?

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राजनीति

देश

उप्र: बसपा विधायक उमा शंकर सिंह के लखनऊ और बलिया स्थित परिसर पर आयकर की छापेमारी

लखनऊ, 25 फरवरी (भाषा) आयकर विभाग ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के एकमात्र विधायक उमा शंकर सिंह के लखनऊ...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.