Tuesday, 25 January, 2022
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भाजपा की नींदें उड़ा सकते हैं आक्रामक जिग्नेश और अल्पेश

जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश ठाकोर जैसों का विधानसभा में प्रवेश और कांग्रेस के पुराने दिग्गजों की अनुपस्थिति एक नयी गत्यात्मकता (डायनैमिक्स) को पैदा कर सकती है.

भड़काऊ और जातिवादी हार्दिक पटेल नहीं हो सकते जन-जन के नेता

पाटीदार नेता का एजेंडा खतरनाक और सीमित है. हार्दिक पटेल उपमहाद्वीप के उन भड़काऊ नेताओं की सूची में आ गए हैं, जिन्होंने किसी नस्लीय,...

चुनाव नतीजों का तीखा विश्लेषण बताता है अपेक्षा से अधिक होंगे मोदी की राह में कांटे

गुजरात का प्रचार और भाजपा का खुद का व्यवहार बाताता है कि सत्ताधारी दल भी कमजोर है. उसको अजेय मानने की नादानी तो ना ही करें.

नोटा को नकारात्मकता न मानें

‘नोटा कोई नकारवाद नहीं बल्कि आज का राजनीतिक आदर्शवाद है. यह ‘राजनीति में नैतिकता के लिए फिर से जगह बना रहा है’

मोदी के गुजरात किले के पुराने खम्भे आज भी अडिग, लेकिन बेरोजगारी का दंश झेल रहे युवा वर्ग का विश्वास डिगा

अगर एक्जिट पॉल सही साबित हुए, जैसा कि योगेंद्र यादव कहते हैं, तो मोदी की जीत तय है. 2014 में मिली 27 प्रतिशत की बढ़त तो उनके काम आएगी मगर दीवार दरकती दिख रही है.

चुनाव आयोग के इतिहास में गुजरात चुनाव निम्नतम बिंदु है: योगेंद्र यादव

दिप्रिंट का सवाल: क्या पूर्व आइएएस अधिकारियों को चुनाव आयोग का कर्ताधर्ता नहीं बनना चाहिए, ताकि इसकी स्वतंत्रता बनी रहे ?

गुजरात में ‘केवट’ मोदी ने भाजपा की डूबती नय्या को कराया पार

चुनाव-प्रचार के दौरान कांग्रेस ने भाजपा की कमियों पर प्रहार किया, लेकिन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोई तोड़ उनके पास नहीं था.

चाहा था कांग्रेस-मुक्त भारत; मिल गया: कांग्रेस-युक्त गुजरात

भाजपा की दो स्पष्ट विजय, गुजरात और हिमाचल प्रदेश, के बावजूद राजनीति का वह क्षेत्र खुल गया है, जो की 2019 तक सीलबंद लगता था.

एक स्वयंसेवक ने भी डाला कांग्रेस को वोट- गुजरातियों को हल्के में नहीं ले सकती भाजपा

2012 के उलट, आखिरकार भाजपा को गुजरात में कुछ चुनौती मिल रही है। जिग्नेश मेवाणी, हार्दिक पटेल और खुद भाजपा ही इसके कारक हैं.

आखिर एक दलित के लिए क्या मायने रखती है जिग्नेश की जीत

मैं महसूस कर सकता हूं कि अतीत में आपको क्या कुछ से गुजरना पड़ा होगा क्योंकि एक दलित लड़का कुछ करना चाहे तो उसे...

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UP में प्रियंका का महिला केंद्रित अभियान दूर की कौड़ी, पर BJP को पुरुषवादी मानसिकता पर मंथन की जरूरत

भाजपा के संगठन और सत्ता ढांचे में महिलाओं को बेहद कम प्रतिनिधित्व हासिल है, भले ही प्रधानमंत्री मोदी ‘उज्ज्वला’ और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे महिला-केंद्रित सरकारी कार्यक्रमों की दुहाई देते रहे हों. पिछले 41 वर्षों में इसके जो 41 अध्यक्ष बने उनमें एक भी महिला नेता नहीं थीं. 

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देश

मोदी सरकार ने राज्यों के लिए EC रैंकिंग प्रणाली का किया बचाव , कहा- ‘सुरक्षा उपायों को नुकसान नहीं होगा’

पर्यावरण मंजूरी पर राज्यों की रेटिंग के लिए सरकार की नई प्रणाली की पर्यावरण विशेषज्ञों ने बहुत आलोचना की है, उन्होंने कहा है कि इससे जल्दबाजी में मंजूरी मिल सकती है.

लास्ट लाफ

हर समस्या का एक ‘स्तंभ’ और ‘अच्छे दिनों’ को वास्तविक जीवन से विलय करना

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सबसे अच्छे कार्टून्स.