नरेंद्र मोदी के 2014 के मंत्रिमंडल में शामिल 19 में से चार मंत्री ही उनके दूसरे मंत्रिमंडल में बचे रह गए हैं— नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह, नरेंद्र तोमर, स्मृति ईरानी; और इन सबको लेकर भी अनिश्चितता पैदा हो गई है.
2019 में अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक नक्शा दिखाया जिसमें इराक और सीरिया में आईएसआईएस खिलाफत की तबाही दिखाई गई थी. एक छोटा सा निशान जो रह गया था, उसके लिए उन्होंने कसम खाई कि वो ‘आज रात तक चला जाएगा’.
महामारी के पहले साल में भारत का प्रदर्शन खराब रहा मगर वह इससे तेजी से उबरने वाले देशों में रहा लेकिन वैश्विक माहौल बहुत अनुकूल नहीं है इसलिए बहुत आशावादी होना भी ठीक नहीं.
आईएमएफ ने दुनिया की भावी आर्थिक दशा का जो अनुमान पेश किया है. उसने वैश्विक मंदी की आशंका को मजबूत कर दिया है जिसकी चिंता अमेरिका और विकसित देशों को करनी चाहिए. भारत में मंदी के आसार कम ही हैं.
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.