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Monday, 30 March, 2026
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भारत में उपभोक्ताओं के बढ़ते भरोसे और उम्मीद को कैसे टिकाऊ बनाया जा सकता है

सीएमआईई के उपभोक्ता भावना सूचकांक और रिजर्व बैंक के उपभोक्ता विश्वास सूचकांक में जुलाई में स्पष्ट सुधार वर्तमान स्थिति, अपेक्षाओं और भविष्य की संभावनाओं का एक आकलन प्रस्तुत करते हैं.

मूड ऑफ द नेशन सर्वे सरकार के लिए खतरे की घंटी है और विपक्ष के लिए बड़ी जिम्मेवारी

क्या यह मोदी सरकार के अंत की शुरुआत है ? ऐसा सोचना जल्दबाजी और बैठे-ठाले का फैसला माना जायेगा.

बिलकीस के वो 11 अपराधी जब सड़कों पर आज़ाद घूमेंगे, भारत का सिर शर्म से नीचा हो रहा होगा

मामले के 11 हत्यारों और बलात्कारियों को माफ करने का गुजरात सरकार का फैसला प्रधानमंत्री मोदी महिलाओं की सुरक्षा के बारे में जो कुछ कहते रहे हैं उसका मज़ाक उड़ाता है.

2015 के बाद से शाकाहारी भारतीय थाली की कीमत में 42% का इजाफा, वह भी दही, चाय और फलों को शामिल किये बिना

पांच लोगों के एक औसत परिवार के लिए, हल्के भोजन वाली मासिक थाली की कीमत साल 2015 के 4,700 रुपये से बढ़कर साल 2022 में 6,700 रुपये हो गई है.

दिमागी दबाव बनाने के लिए हवाई क्षेत्र के अतिक्रमण के चीनी खेल का भारत को देना होगा जवाब          

भारत के सामने अपनी सेना को संसाधन पहुंचाने का ही मसला नहीं है, उसके राजनीतिक नेतृत्व को नारेबाजी छोड़कर नतीजे देने वाले सुधारों को लागू करना पड़ेगा. 

अफगानिस्तान में अपने दूतावास का दर्जा बढ़ाकर भारत ने उठाया सकारात्मक कदम

लेकिन तालिबान द्वारा ताकत के अनावश्यक इस्तेमाल की कई कहानियां हैं, और ये उसे भारत का नया करीबी दोस्त बनने से रोकती हैं.

अटल बिहारी वाजपेयी का लीडरशिप फार्मूला: बड़ा दिल व सुलझा नेतृत्व

अटल बिहारी वाजपेयी जी की 93वीं वर्षगांठ पर एक नज़र उन बातों पर जो उन्हें महान नेता बनाती है: इरादे मजबूत लेकिन दिल से कवि.

मुर्शिदाबाद कलकत्ता से क्यों हार गया- मुगलों के उलट, ब्रिटिश बैंकिंग परिवारों पर नहीं थे निर्भर

मुर्शिदाबाद ईस्ट इंडियन कंपनी द्वारा स्थापित पहले जिलों में से एक था. अब ममता बनर्जी सरकार इसे तीन हिस्सों में बांटने की तैयारी में है.

सावरकर और नेहरू ने भारत का भविष्य गढ़ने में इतिहास का सहारा लिया लेकिन गांधी कभी इसके पक्षधर नहीं रहे

मूलत: परस्पर विरोधी होने के बावजूद सावरकर और नेहरू की कृतियों में कल्पनाशीलता के निशान मिलते हैं, भले ही यह सकारात्मक हों या नकारात्मक.

नीतीश कुमार ‘पहले बिहारी PM-पहले कुर्मी पीएम’ उम्मीदवार बनते हैं तो क्यों 2024 के चुनाव में कांग्रेस का अच्छा दांव होंगे

प्रधानमंत्री पद के विपक्षी उम्मीदवार के रूप में नीतीश कुमार कांग्रेस के लिए सर्वश्रेष्ठ दांव हो सकते हैं, बशर्ते वह अभी भी यह न माने बैठी हो कि राहुल गांधी ही मोदी को कड़ी चुनौती दे सकते हैं.

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‘समस्त’ को राजनीतिक विवादों में न घसीटें: जिफरी थंगल

कोझिकोड (केरल), 30 मार्च (भाषा) समस्त केरल जमीयतुल उलेमा के अध्यक्ष सैयद मोहम्मद जिफरी मुथुकोया थंगल ने नेताओं से आग्रह किया है कि वे...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.