कांग्रेस ने न केवल अपनी विचारधारा और चिंतन में दलितों को आत्मसात किया बल्कि उनके नेतृत्व के विकास पर भी बल दिया. आजादी के समय से ही कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता दलित होते रहे.
अर्थव्यवस्था फिलहाल उम्मीद से बेहतर काम कर रही है लेकिन बेरोजगारी, शिक्षा व स्वास्थ्य सेवा की बदहाली जैसे मसले भावी श्रम शक्ति के विकास को अवरुद्ध कर रहे हैं.
भारत के आर्थिक व रणनीतिक हितों में संतुलन बनाकर, रूस और अमेरिका के साथ रिश्ता निभाते हुए और चीन को अपने ऊपर हावी न होने देकर मोदी कुशलता से आगे बढ़ते रहे हैं. अब जी-20 की अध्यक्षता के एक साल का बेशक वे भारत के फायदे के लिए उपयोग करेंगे.
अपनी वापसी के जतन करते हुए इंदिरा गांधी जिस तरह जनता पार्टी में फूट डाली, मोरारजी की सरकार गिराकर कांग्रेस के समर्थन से चौधरी चरण सिंह की सरकार बनवाई, उन्हें लोकसभा का मुंह तक न देखने देकर समर्थन वापस लिया और मध्यावधि चुनाव कराकर फिर से कांग्रेस को सत्ता में लाकर प्रधानमंत्री पद तक पहुंचीं.
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपने दो वर्षों के कार्यकाल के दौरान इस धारणा को गलत साबित करने की कोशिश की है कि किसी छोटे से क्षेत्र के लिए अमेरिकी तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत नहीं करना चाहेंगे.
यों, पिछले दिनों अतिआत्मविश्वास में अखिलेश यादव द्वारा खाली की गई आजमगढ़ लोकसभा सीट सस्ते में गंवा चुकी सपा मैनपुरी में अपने संस्थापक मुलायम सिंह यादव की विरासत बचाने की लड़ाई में किसी भी तरह से पिछड़ने को तैयार नहीं है.
पाकिस्तान हम पर 'ईरान जैसा' हमला करने के लिए बेताब होगा, और चीन हमें 'असममित विस्तार' का मौका दिए बिना ही एक हवाई अभियान को अंजाम देने की योजना बना रहा होगा. भारत के पास खुद को बदलने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.