भाजपा के आर्थिक मॉडल के विपरीत, जो बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाता है, कांग्रेस उन लोगों पर ध्यान केंद्रित करती है जो भूमि और श्रम से धन पैदा करते हैं.
आठ प्रमुख क्षेत्रीय नेताओं का दक्षिण भारत पर काफी प्रभाव है. दक्षिण भारत में राजनीति के राज्य-वार गहन विश्लेषण से यह पता चल सकता है कि 2024 में क्या हो सकता है.
बाइडेन-हैरिस प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका दिवाली समारोह वास्तव में त्योहार की भावना को प्रतिबिंबित करे. यह न्याय और समता के बारे में है, केवल प्रतीकवाद के बारे में नहीं.
बात चाहे आर्थिक हालत की हो या फिर शिक्षा और रोजगार के अवसरों की — भारत में जाति ही इनको निर्धारित करने वाली धुरी बनी हुई है. जातिगत गैर-बराबरी की सच्चाई को समझने के लिए बिहार की ही तरह पूरे देश को एमआरआई की जरूरत है.
हाल के वर्षों में शेयर बाजार में सर्वश्रेष्ठ लाभ ‘लार्ज-कैप’ वाले शेयरों से नहीं ‘मिड-कैप’ और ‘स्माल-कैप’ वाली कंपनियों से मिला, जिनमें से कई को तो नाम से तुरंत पहचाना भी नहीं जाता.
नक्सलवाद के खिलाफ जंग के कई योद्धाओं का कोई जिक्र नहीं किया जाता लेकिन गृह मंत्रालय के ‘समाधान’ कार्यक्रम को इन्हीं योद्धाओं के प्रयासों के कारण कामयाबी मिली.