जब ऐसा लग रहा था कि मध्य-पूर्व अमन की गहरी नींद में सोने लगा है, तभी वहां फिर से आग सुलगाकर हमास ने वहां के कई विरोधाभासों और इस्लामी दुनिया से जुड़े सवालों को उभार दिया है
1857 के विद्रोह के लिए 'निचली' जाति के अंसारी लोगों को दोषी ठहराने से लेकर उन्हें AMU में प्रवेश न देने तक, यूनिवर्सिटी के संस्थापक सैयद अहमद खान ने कई मौकों पर पसमांदाओं के साथ भेदभाव किया है.
यहां तक कि जो लोग यह घोषणा करते हैं कि विधानसभा चुनावों के इस दौर में बीजेपी अधिकांश राज्यों को हार जाएगी, वे भी इस बात से आश्वस्त हैं कि नरेंद्र मोदी लोकसभा में एक और कार्यकाल के लिए वापस आएंगे.
इज़रायल-फिलिस्तीन संघर्ष की जटिल और गहरी जड़ें मध्य-पूर्व में शांति मध्यस्थ के रूप में चीन की इच्छित भूमिका और महत्वाकांक्षाओं के लिए एक कठिन चुनौती पेश करती हैं.
अफगान तालिबान की सत्ता में वापसी ने स्वाभाविक रूप से उनके सभी संबद्ध समूहों को फिर से कार्रवाई में आने के लिए प्रोत्साहित किया और पाकिस्तान निश्चित रूप से सबसे पसंदीदा टारगेट है.
देश की वित्तीय राजधानी में इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण का काम देर से शुरू हुआ और इसके साथ रियल एस्टेट के निर्माण में भी जबरदस्त तेजी आई, लेकिन वायु प्रदूषण में भी वह देश की राजधानी को टक्कर देने लगी है.
नक्सलवाद के खिलाफ जंग के कई योद्धाओं का कोई जिक्र नहीं किया जाता लेकिन गृह मंत्रालय के ‘समाधान’ कार्यक्रम को इन्हीं योद्धाओं के प्रयासों के कारण कामयाबी मिली.