संयुक्त राष्ट्र साइबर अपराध संधि पर बातचीत के लिए सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रस्ताव में धारा 66ए के जैसे कदम उठाने पर जोर देने और अन्य बातों के अलावा ‘घोर आक्रामक’ संदेशों को साझा करना अपराध की श्रेणी में लाने का आह्वान किया गया.
तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.