यूनिवर्सिटी के नए अंडरग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क में अनिवार्य पाठ्यक्रमों में पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी नहीं होगी, इसमें बिजनेस कम्युनिकेशन, पब्लिक स्पीकिंग, राइटिंग स्किल्स आदि शामिल है.
अगर सरकार टैक्सपेयर्स का पैसा देश को बेहतर बनाने में खर्च करना चाहती है, तो ज्यादा अदालतें बनाए, टूटती हुई नौकरशाही को सुधारे, लेकिन, ज़ाहिर है, नेता सिर्फ अपने बारे में सोचेंगे.