राहुल गांधी ने कुछ दिनों पहले सरकार से आग्रह किया था कि विदेश में निर्मित टीकों के भारत में उपयोग को अनुमति दी जाए. इसके बाद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने उन पर विदेशी कंपनियों के लिए लॉबिंग करने का आरोप लगाया था.
बहुत से भाजपा नेताओं ने उन सूबों में जहां पार्टी सत्ता में है, अब सरकारी अधिकारियों पर दोष मढ़ना शुरू कर दिया है कि वो मरीज़ों को पर्याप्त सुविधाएं मुहैया नहीं करा पा रहे हैं.
नीति आयोग के डॉ वीके पॉल ने कई राज्यों में रेमडिसिविर की मांग की खबरों को ‘चिंताजनक’ बताया है और कहा है कि अगर ठीक से इस्तेमाल की जाए, तो इस दवा की कोई कमी नहीं है.
3-8 अप्रैल के बीच महाराष्ट्र में हर रोज़ कोविड वैक्सीन के 4 लाख से अधिक डोज़ लगाए गए. लेकिन 9-11 अप्रैल के बीच ये संख्या घटकर, 2.5 लाख से कुछ कम रह गई.
निरंजनी अखाड़े के महंत नरेंद्र गिरी के अलावा अन्य अखाड़ों से जुड़े कई अन्य संत भी कोविड-19 की चपेट में आए हैं. नए मामलों को मिलाकर अब तक दोनों अखाडों में कुल नौ संत कोविड-19 पीड़ित पाए गए हैं .
कोविड टेस्ट नतीजे आने में लगने वाले लंबे समय से लेकर रेमडिसिविर और अस्पताल में जगह हासिल करने तक में आ रही मुश्किलों को देखते हुए मरीजों के परिवार ही नहीं, डॉक्टर तक कहने लगे हैं कि हालात बदतर होते जा रहे हैं.
एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.