हिंदी की किताबें दुकानों से गायब होती जा रहे हैं, किताबों की चर्चा के लिए अब अखबारों में जगह नहीं, ऐसे में पुस्तकों को बचाने और पाठकों को उनसे जोड़ने के लिए हर संभव कोशिश जरूरी है चाहे वो व्यक्तिगत स्तर पर ही हो.
अमेरिका के लक्ष्य अधूरे रह गए, अब उसके पास न तो इतनी ताकत है और न इतना जोश है कि वह युद्ध फिर शुरू कर सके; और ईरान? घुटने टेकने की जगह वह पूरे संकल्प के साथ लड़ा. उसकी बागडोर अब ज्यादा कट्टरपंथी लोगों के हाथ में है