सप्लाई चेन में रुकावट, शिपिंग लागत बढ़ना और जरूरी सामान की कमी से दुनिया में सप्लाई शॉक आ सकता है, जिससे अर्थव्यवस्थाएं अस्थिर होकर मंदी में जा सकती हैं.
युद्ध के अहम मोड़ के करीब पहुंचने पर मोदी सरकार अपने विकल्पों पर विचार कर रही है और अलग-अलग देशों व समुद्री रास्तों से तेल-गैस खरीद के प्रयासों की समीक्षा कर रही है.
नेताओं की हत्या और भारी बमबारी, चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, हार और आत्मसमर्पण करवाने के लिए काफी नहीं हो सकती. इसके लिए लंबा और बहुत कठिन युद्ध लड़ना पड़ सकता है.
आर्थिक वृद्धि धीमी ज़रूर हुई है, लेकिन गिरी नहीं है, इसलिए बाज़ार ने जल्दी निष्कर्ष निकाल लिया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस झटके को झेल चुकी है. यह निष्कर्ष जल्दबाजी है.
एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.
मुझे लिखित संदेश मिला कि कानू सान्याल अपना ‘प्रतिनिधिमंडल’ मेरे पास भेजना चाहते हैं. उम्मीद की जा रही थी कि अपने उग्र समर्थकों के साथ आ रहे दुबले-पतले गुस्सैल बूढ़े आदमी के साथ बेहद तीखी मुठभेड़ होगी.