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Friday, 17 April, 2026
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मत-विमत

डार्विन की थ्योरी पर उठते सवाल—वैज्ञानिक जगत में क्यों बढ़ रही है असहमति

द रॉयल सोसायटी के फेलो डेनिस नोबल neo-Darwinism के उस विचार से असहमत हैं कि सभी जैविक कारण सिर्फ ज़ीन से आते हैं.

ईरान युद्ध से अमेरिका में मंदी तय—भारत का आम आदमी भी प्रभावित होगा

सप्लाई चेन में रुकावट, शिपिंग लागत बढ़ना और जरूरी सामान की कमी से दुनिया में सप्लाई शॉक आ सकता है, जिससे अर्थव्यवस्थाएं अस्थिर होकर मंदी में जा सकती हैं.

‘भारत जानता है उसका हित कहां है’—ईरान युद्ध बढ़ने के बीच नई दिल्ली कैसे संभाल रही स्थिति

युद्ध के अहम मोड़ के करीब पहुंचने पर मोदी सरकार अपने विकल्पों पर विचार कर रही है और अलग-अलग देशों व समुद्री रास्तों से तेल-गैस खरीद के प्रयासों की समीक्षा कर रही है.

ईरान अभी तक युद्ध क्यों नहीं हारा? वजह सिर्फ तेल और ड्रोन नहीं हैं

नेताओं की हत्या और भारी बमबारी, चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, हार और आत्मसमर्पण करवाने के लिए काफी नहीं हो सकती. इसके लिए लंबा और बहुत कठिन युद्ध लड़ना पड़ सकता है.

क्या खत्म हो रहा है ‘नीतीश युग’? बिहार की राजनीति नए मोड़ पर

सामाजिक न्याय से वैचारिक ध्रुवीकरण तक—बिहार की राजनीति कई चरणों से गुजरते हुए नए दौर में प्रवेश करती दिख रही है.

ओडिशा में बीजेपी महाराष्ट्र जैसा खेला चाहती है, लेकिन नवीन पटनायक आखिरी बाधा हैं

अब दबाव में आए नवीन पटनायक वह सब कर रहे हैं जो पहले कम ही करते थे—रोज़ विधानसभा आना, बीच-बीच में बोलना, टीवी चैनलों को बयान देना और सड़कों पर उतरना.

युद्ध के दौरान सोने की कीमतें गिर रही हैं. यह साफ संकेत है कि असली आर्थिक झटका आने वाला है

आर्थिक वृद्धि धीमी ज़रूर हुई है, लेकिन गिरी नहीं है, इसलिए बाज़ार ने जल्दी निष्कर्ष निकाल लिया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस झटके को झेल चुकी है. यह निष्कर्ष जल्दबाजी है.

सुप्रीम कोर्ट ऐसे नियम बनाए कि जज रिटायर होने के बाद अपने पद की गरिमा को ‘किराये’ पर न दे सकें

भारत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विदेशी अदालतों में गवाह बनकर खड़े हो रहे हैं, यह एक संस्थागत समस्या बन गई है.

अमेरिका-इजरायल-ईरान जंग में अमेरिका की रणनीतिक हार पहले से तय है

युद्ध के तीन सप्ताह पूरे होने पर मैं बेहिचक यह कह सकता हूं कि ईरान अपनी रणनीति को लागू करने में पूरी तरह सफल रहा है. 

‘विश्वगुरु’ बनने का हमारा-आपका भ्रम, दुनिया को देखने की समझ बिगाड़ रहा है

एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.

मत-विमत

नक्सलवाद से पश्चिम बंगाल की लड़ाई पुलिस एक्शन तक ही सीमित नहीं थी

मुझे लिखित संदेश मिला कि कानू सान्याल अपना ‘प्रतिनिधिमंडल’ मेरे पास भेजना चाहते हैं. उम्मीद की जा रही थी कि अपने उग्र समर्थकों के साथ आ रहे दुबले-पतले गुस्सैल बूढ़े आदमी के साथ बेहद तीखी मुठभेड़ होगी.

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एअर इंडिया के पायलट के पास से बरामद हुआ गांजा, अमेरिका से वापस भेजा गया

नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) दिल्ली से अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को जाने वाली एक उड़ान में यात्री के तौर पर सफर करने वाले एअर...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.