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Saturday, 25 April, 2026
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डॉ. पायल की आत्महत्या: सवर्णों के बीच समाज सुधार आंदोलन की सख्त ज़रूरत

भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है और उसमें दर्ज एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) एक्ट दलित-आदिवासियों को ब्राह्मणवाद के सामंती मानस से संरक्षण प्रदान करता है.

वे चार वजहें, जिसके कारण हार गई कांग्रेस

कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र के माध्यम से सही चाल चली थी, लेकिन वह मसले चुनावी प्रचार में पीछे छूट गए. रोजगार की योजना, किसानों को राहत, ओबीसी के लिए कार्यक्रम आदि के बारे में कांग्रेस मतदाताओं को बता ही नहीं पाई.

क्या मोदी अपने मंत्रिमंडल को आपराधिक छवि के सांसदों से मुक्त रख पाएंगे

देश की राजनीति को अपराधीकरण से मुक्त कराने और भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के चुनाव आयोग और न्यायपालिका के प्रयास राजनीतिक दलों...

प्रतिरोध की परंपरा में अविस्मरणीय है गणेशशंकर विद्यार्थी के ‘प्रताप’ का योगदान

हिन्दी पत्रकारिता की जो परम्परा शुरू की गई, सच्चे मायनों में वह अन्यायी सत्ताओं के प्रतिरोध की ही रही है.

मोदी और अमित शाह को चिंता करनी चाहिए: कोई भी पार्टी इतने बड़े जनादेश को संभाल नहीं पाई है

भाजपा को याद रखना चाहिए कि 1971 और 1984 की भारी जीतों के बाद इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के साथ क्या हुआ था.

जनादेश के सम्मान का अर्थ ये नहीं कि जो चुनाव जीत गये हैं हम उन्हें माथे पर बैठा लें

विपक्ष को सीखना होगा कि मुद्दे को चिन्हित करके अपनी बात कहे, रचनात्मक और सकारात्मक ढंग से अपनी बात रखनी होगी और लोगों की आशा-आकांक्षा से जुड़ने वाली भाषा अख्तियार करनी होगी.

एक दलित मानवाधिकार कार्यकर्ता की नजर से कैसा दिखता है ये जनादेश

भारतीय समाज को निर्मम व निकृष्ट तरीके से विखंडित कर देने का इनाम बीजेपी को मिला है. वंचित तबकों के लिए इस जनादेश का क्या है मतलब और इसका कैसा होगा प्रतिकार.

भारतीय सशस्त्र सेनाओं का राजनीतिकरण न करें, पुलिस के परिणाम आपके सामने है

विगत तीन दशकों के दौरान सशस्त्र सेनाओं के राजनीतिकरण की सबसे बड़ी वजह जम्मू कश्मीर में उनकी तैनाती है.

सिर्फ मोदी का व्यक्तित्व नहीं, 2019 के चुनावों में भाजपा की भारी जीत के पीछे थीं ये प्रमुख वजहें

भाजपा के प्रदर्शन के इर्द-गिर्द धारणाएं शायद ही इसे ड्राइविंग सीट पर बैठाने के लिए काफी थीं. मगर भाजपा को 200 से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में 50 प्रतिशत वोट मिले.

सावरकर ब्रिटेन के पिट्ठू थे या एक रणनीतिक राष्ट्रवादी? राय बनाने से पहले इसे पढ़ें

विनायक दामोदर सावरकर की याचिकाओं की कुछ पंक्तियों को बिना पूर्णता में देखे या बिना संदर्भ के उद्धृत करना बौद्धिक बेईमानी है.

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दंतेवाड़ा के कलेक्टर ओपी चौधरी ने नक्सल-प्रभावित ज़िले में शिक्षा को कैसे बढ़ावा दिया?

तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.

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तेलंगाना आरटीसी की हड़ताल के दौरान आत्मदाह का प्रयास करने वाले चालक की मौत, अनुग्रह राशि घोषित

हैदराबाद, 24 अप्रैल (भाषा) तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टीआरटीसी) की हड़ताल के दौरान 23 अप्रैल को दिन में आत्मदाह करने की कोशिश करने...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.