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Saturday, 25 April, 2026
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झारखंड में ऐसा क्या है कि वहां सबसे ज्यादा ‘मॉब लिंचिंग’ हो रही है?

झारखंड में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले मॉब लिंचिंग की घटना से वहां समाज में ध्रुवीकरण तेज हो सकता है. लेकिन इस क्रम में वहां कानून के शासन के होने या न होने का सवाल खड़ा हो गया है.

बिहार में मासूम बच्चों के काम क्यों न आई आयुष्मान भारत योजना

बिहार जैसे गरीब राज्यों और इंश्योरेंस आधारित आयुष्मान भारत योजना के बीच कोई तालमेल ही नहीं है. ये योजना देश के विकसित इलाकों के लिए बनी है. बिहार के लिए सरकार को कुछ और सोचना होगा.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति मसौदा पुरातनपंथी नहीं पर शक है कि इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा

इस दस्तावेज के सुझावों को देखें तो पिछले पांच वर्षों में नरेंद्र मोदी सरकार इसके विपरीत दिशा में चली है.

राम रहीम की पैरोल अर्ज़ी पर इतना हंगामा क्यों, यह तो न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है

पैरोल किसी भी अपराध के लिये सज़ा पाने वाले अपराधी का अधिकार है और अपराधी को पैरोल पर रिहा करने का निर्णय प्रशासन के विवेक पर निर्भर करता है.

मुसलमानों को नरेंद्र मोदी के वादों को किस तरह देखना चाहिए?

अगर अल्पसंख्यक खुले मन से सरकार के साथ बातचीत और संवाद में जाते हैं तो इसके बाद का दारोमदार बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी पर होगा कि संसद के सेंट्रल ह़ॉल में कही गई अपनी बातों और वादों पर खरे उतरें.

लोहिया और आंबेडकर के सपनों को क्या पूरा कर पाएंगे अखिलेश?

लोकसभा चुनाव के दौरान यूपी में दलितों ने 25 साल बाद साइकिल चुनाव चिह्न पर वोट डाला है. सपा और दलितों के बीच की कड़वाहट घटी है. क्या अखिलेश इस समय दलितों की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाएंगे?

कबीर सिंह: प्रेम नहीं, सामंती ‘मर्दाना कुंठा’ का बेशर्म मुज़ाहिरा है

दरअसल, 'कबीर सिंह' कोई प्रेम कहानी नहीं है, यह समाज में चारों तरफ पसरी सामंती मर्द यौन कुंठाओं का शोषण और उसकी बिक्री है!

मोदी अकेले नहीं, दुनिया भर में दक्षिणपंथी लोकप्रिय अधिनायकों का दौर

दक्षिणपंथी अधिनायकवाद की एक प्रवृत्ति ये भी है कि वो समर्थन तो वंचितों से लेता है, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करता. धार्मिक उन्माद दक्षिणपंथी अधिनायकवाद का हथियार है.

आरक्षण के खिलाफ क्यों बोलने लगे हैं दलित नेता

अगर आरक्षण को खत्म करने की बात अगर कोई सवर्ण करेगा तो जनाक्रोश फैल सकता है. जबकि अगर कोई दलित-वंचित पहचान वाला नेता आरक्षण को खत्म कर देने की बात करे तो आरक्षित वर्गों के भीतर कई तरह की प्रतिक्रयाएं होने लगती हैं.

भारत में चुनाव सुधार के लिए जर्मनी से कुछ सबक

भारत में भी समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के जरिए प्रतिनिधियों का चुनाव होना चाहिए, या फिर जर्मनी की तरह मिली-जुली प्रणाली अपनाई जानी चाहिए.

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राइटिंग्स ऑन दि वॉल—नक्सलबाड़ी की क्रांति से ‘विनर्स’ तक: बंगाल की नई इबारत

पश्चिम बंगाल चुनाव में वामपंथी दल और कांग्रेस खुरचन में हिस्सेदारी के लिए होड़ लगा रहे हैं. पूर्वी-मध्य भारत में माओवाद को कब्र में दफन कर दिया गया है, तो केरल में वे सरकार विरोधी दोहरी भावना से जूझ रहे हैं.

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उच्च शिक्षा में स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के समावेश की जरूरत : डॉ. अतुल कोठारी

प्रयागराज, 25 अप्रैल (भाषा) शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने शनिवार को कहा कि तेजी से बदलते शैक्षिक परिदृश्य...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.