बोम्मई ने कहा, हालांकि, 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को 19 सीट मिली थीं. आज हम और भी बेहतर स्थिति में हैं और 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए सभी तैयारियां करेंगे.
कर्नाटक चुनाव में 224 में से 135 सीटों पर जीत हासिल करने वाली पार्टी को अपने पारंपरिक सीटों के अलावा कित्तूर-कर्नाटक, केंद्रीय जिलों और पुराने मैसूरु क्षेत्र में लाभ मिला.
कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, 'कर्नाटक ने लोकतंत्र को नई रोशनी दिखाई है. यह 6.5 करोड़ कन्नड़ लोगों की जीत है. कर्नाटक के गौरव की जीत हुई है!'
सुआर सीट पहले आजम खान के बेटे अब्दुल्ला के पास थी, जिसकी अयोग्यता के कारण उपचुनाव की जरूरत पड़ी. अपना दल (एस) ने जहां एक मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में उतारा था, वहीं सपा ने पूर्व बसपा नेता अनुराधा चौहान को मैदान में उतारा था.
क्षेत्र में भाजपा की सीटों की संख्या 30 से घटकर 16 हो गई है. इसका अहम फैक्टर लिंगायतों में गुस्सा था, जिससे इसके कई धार्मिक और सामुदायिक नेताओं ने अपने लोगों से पार्टी का समर्थन नहीं करने को कहा था.
निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने वाले मुथालिक को 4,508 वोट मिले. चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने दावा किया था कि बीजेपी ने हिंदुत्व के लिए पर्याप्त काम नहीं किया है.
तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.