समाजवादी पार्टी ने यूपी में 37 लोकसभा सीटें जीतीं, जिससे वह भारत की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई. मुलायम सिंह यादव की मृत्यु के बाद अखिलेश के लिए यह पहली अग्निपरीक्षा थी.
देवी लाल की पौत्रवधू जेजेपी की नैना चौटाला और आईएनएलडी की सुनैना चौटाला ने भी पारिवारिक गढ़ हिसार में खराब प्रदर्शन किया, जहां दोनों को करीब 22,000 वोट ही मिले.
मेनका नौवीं बार लोकसभा में पहुंचने का लक्ष्य लेकर चल रही हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री ने 2019 में इस निर्वाचन क्षेत्र से लगभग 14,000 मतों से जीत हासिल की थी.
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राज बब्बर के नाम को पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने 30 अप्रैल को मंजूरी दे दी थी, जिसमें वरिष्ठ पार्टी नेता और हरियाणा के पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव के दावों को नजरअंदाज किया गया था.
मुंबई की छह सीटों में से तीन पर दोनों शिवसेना के बीच सीधा मुकाबला था. दोपहर 1 बजे तक, शिवसेना (यूबीटी) इन सभी सीटों पर शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना से आगे चल रही थी.
तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.