चुनाव आयोग के सुबह 11.39 बजे के आंकड़ों के अनुसार, कन्हैया को 1,58,030 वोट मिले, जबकि मौजूदा भाजपा सांसद मनोज तिवारी 1,98,927 वोटों के साथ आगे चल रहे हैं.
मुफ्ती का अनंतनाग-राजौरी सीट पर जीत न पाना जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव से पहले पीडीपी के लिए बड़ा झटका है. सुबह 10:20 बजे तक, नेशनल कॉन्फ्रेंस के मियां अल्ताफ 73,000 वोटों से आगे चल रहे थे.
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय चौधरी दलबीर सिंह की बेटी कुमारी शैलजा ने अपने पिता की मृत्यु के बाद 1988 में उपचुनाव के साथ राजनीति में कदम रखा. हालांकि, वह जनता दल के हेत राम से हार गईं.
निर्वाचन आयोग के 10 बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक, 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों की सभी 543 सीटों के लिए डाले गए वोटों की गिनती में बीजेपी 203 सीटें जीत चुकी है और 37 पर आगे चल रही है. कांग्रेस 79 सीटें जीत चुकी है और 20 पर आगे चल रही है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा, ‘और भी कई लोकसभा क्षेत्रों में यही शिकायतें मिली हैं. हम राज्य निर्वाचन पदाधिकारी से शिकायत कर रहे हैं. आयोग को जवाब देना चाहिए कि किन परिस्थितियों में मशीनें बदली गई हैं और चुनाव परिणाम पर होने वाले असर के लिए कौन ज़िम्मेदार होगा.’
पार्टी नेताओं और एक्सपर्ट्स का दावा है कि मोदी भाजपा के अभियान के अगुआ बने हुए हैं, जबकि शाह ‘इसकी दिशा तय करते हैं’. उन्होंने कहा कि शाह की भारतीय राजनीति और उसके सार की समझ उन्हें दूसरों से अलग बनाती है.
बीजेपी ने राज्य की 60 सीटों में से 46 सीटें जीतीं. एनडीए की सहयोगी एनपीपी 5 सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर रही, जबकि एनसीपी के अजित पवार गुट को 3 सीटें मिलीं. खांडू तीसरी बार सीएम बनने के लिए तैयार हैं.
तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.