यकीनन यह मोदी का करिश्मा ही है कि जो विश्लेषक उनका मजाक उड़ाते हुए इस चुनाव में उनकी सरकार के पक्ष में अंडरकरेंट अथवा प्रो-इन्कम्बैंसी है, अब उनके निष्कर्षों का मजाक उड़ रहा है.
इन चुनावी सर्वेक्षणों की वजह से मतदाताओं की चुनने की स्वतंत्रता प्रभावित होती है. ये साफ-सुथरे चुनाव में बाधक हैं. इन पर पाबंदी लगाने के लिए चुनाव आयोग की गाइडलाइन में संशोधन किया जाना चाहिए.
कुछ दलों को मिल रहे अनुचित फायदे को रोकने के लिए चुनाव आयोग को एक दिन में या यथासंभव न्यूनतम अवधि में चुनाव संपन्न कराने का लक्ष्य निर्धारित करना होगा.
तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.