ताजा घटनाक्रम यह गंभीर सबक सिखाता है कि युवा पीढ़ी की ताकत को कमतर न समझें, वह भविष्य को बूढ़ी जमात के मुकाबले बेहतर नज़र से देखती है. 1990 और 2006 के जन आंदोलन के बाद से नेपाल को धोखा दे चुके शासक वर्ग से वह बुरी तरह निराश हो चुकी है.
यह सब केवल भारत में ही नहीं चल रहा है. दुनियाभर में जो लोग तानाशाही की अतिवादी कार्रवाइयों पर तालियां बजाते हैं वे पाते हैं कि बुलडोजर उनके दरवाजे पर भी आ पहुंचा है
तीन दशकों के अंतराल के बाद 1992 में लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार फिर शुरू हुआ, लेकिन व्यापार की मात्रा पहले जैसी नहीं रही क्योंकि जिन बाज़ारों को यह जोड़ता था वे हाईवे से बेहतर तरीके से जुड़े हुए थे.
बांग्लादेश के हिंदू नेताओं में से कुछ जेल में हैं और कुछ छिपे हुए हैं. वहीं, कुछ पत्रकार जिन्होंने उनके लगातार हो रहे उत्पीड़न की रिपोर्ट करने की कोशिश की, या तो अपनी नौकरी खो बैठे या रहस्यमय तरीके से उनकी मौत हो गई.
बाढ़ के कारण दशकों के सबसे मुश्किल दौर में, पंजाब को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री मोदी आएंगे. अगर उनके पास बिहार दौरे का समय है, तो पड़ोसी पंजाब का एक छोटा सा दौरा क्यों नहीं?
नीतियों की यह अनिश्चितता भारत से प्रतिभाशाली लोगों के बाहर जाने (ब्रेन ड्रेन) को तेज़ कर रही है, खासकर टेक और डिजिटल इनोवेशन में, जहां कुशल पेशेवर विदेशों में अधिक स्थिर माहौल खोज रहे हैं.
तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.