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Tuesday, 3 February, 2026
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भारत के मुसलमानों पर मगरमच्छी आंसू बहाने के बजाए इमरान को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए

अगर पाकिस्तान यह चाहता है कि हिन्दुस्तान का नागरिकता बिल नाकामयाब हो जाए तो उसे अपने देश के मज़हबी अल्पसंख्यकों के साथ बर्ताव का तौर-तरीका बदलना होगा.

डीयू के एड-हॉक शिक्षकों का प्रदर्शन अंदर तक सड़ चुके हमारे स्नातक कार्यक्रम की ओर इशारा करता है

एक विश्वविद्यालय किसी भी स्थायी उत्कृष्टता को प्राप्त नहीं कर सकता है जब तक कि उसके पास एक मजबूत स्नातक कार्यक्रम न हो. और इसके लिए अच्छे शिक्षकों की जरूरत है.

नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध भारत की आत्मा को बचाने की असली लड़ाई है

सिटिजनशिप बिल के साथ गंगा एकदम से उल्टी बह निकली है और हम धर्मनिरपेक्ष राज्य से ‘धर्म-सापेक्ष’ राज्य के मुहाने पर आ गये हैं. वे सभी जो आइडिया ऑफ इंडिया में यकीन करते हैं अब उठ खड़े हों.

गली-दर-गली देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की कोशिश शुरू हो गई है

‘एक देश, एक विधान, एक निशान’ के नाम पर बहुलता को नष्ट करने को प्रतिबद्ध पार्टी कुछ क्षेत्रों में ‘अल्पसंख्यकों के केन्द्रीकरण’ से ‘खतरा’ महसूस कर उनकी आबादी का स्वरूप बदलने पर आमादा दिखती है.'

नागरिकता विधेयक पर सुप्रीम कोर्ट क्या कहेगा – मोदी और शाह को इसकी परवाह नहीं

सुप्रीम कोर्ट यदि हस्तक्षेप करते हुए नागरिकता विधेयक में असंवैधानिक संशोधनों को निरस्त करने का फैसला करता है, तो भी मोदी-शाह को ज्यादा दुख नहीं होगा.

कांग्रेस और लेफ्ट की 1971 की ऐतिहासिक भूल और नागरिकता संशोधन विधेयक

बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान भारत आए बंगाली शरणार्थियों को नागरिकता देने के मामले को धर्म से जोड़कर बीजेपी ने मामले को पेचीदा और राजनीतिक बना दिया है.

नागरिकता संशोधन कानून पारित कराने के पीछे मोदी सरकार की विचारधारा और तत्परता

अपने इस कार्यकाल में मोदी-शाह वाजपेयी 2 नहीं बनना चाहते और न ही कोई काम अधूरा छोड़ना चाहेंगे. यही कारण है कि वो अपने अजेंडे पर तेजी से बढ़ रहे हैं.

नागरिकता विधेयक का एकमात्र उद्देश्य है गैर-मुस्लिमों को बचाना और मुसलमानों को तंग करना

अगली बार एनआरसी लागू – असम और पूरे भारत में करते समय मोदी सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि गैर-मुस्लिमों को बचाया जाए और अधिक से अधिक मुसलमानों को नागरिक रजिस्टर से बाहर रखा जाए.

यौन अपराधों से हमें उतनी दिक्कत नहीं है, जितनी होनी चाहिए

बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के मामले में निश्चित ही बड़ी और कड़ी सज़ा होनी चाहिए. उसके साथ ही हमें अपने समाज की मूल संरचना को भी बदलना होगा.

एनकाउंटर और कस्टडी डेथ से क्यों नहीं रुकेंगे बलात्कार

एनकाउंटर या कस्टोडियल डेथ से देश में अराजकता आएगी, जिसका सबसे ज्यादा शिकार गरीब, कमजोर वर्ग और औरतें ही होंगी. कानून का राज मजबूत करने से ही रुकेंगे बलात्कार

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एडवेंट आदित्य बिड़ला हाउसिंग फाइनेंस में 2,750 करोड़ रुपये निवेश करेगी

मुंबई, तीन फरवरी (भाषा) निजी इक्विटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एडवेंट इंटरनेशनल, आदित्य बिड़ला हाउसिंग फाइनेंस (एबीएचएफ) में 14.3 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

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