न्यूज़ीलैंड की जमीन पर जीत हासिल करना कभी भी आसान नहीं रहा. अपने घर में कीवियों ने हमेशा टीम इंडिया को कड़ी टक्कर दी है. वेलिंगटन के बेसिन रिजर्व में तो भारतीय टीम के रिकॉर्ड्स भी अच्छे नहीं हैं.
क्या ये अच्छा नहीं होता कि हमारे माननीय जज समस्या के मूल कारण से निपटने में अपना समय और ऊर्जा लगाते ? मूल कारण है, हमारी विधिक प्रणाली में न्याय का देरी से मिलना और कुछ यों मिलना कि लगे न्याय हुआ ही नहीं.
एक नए अध्ययन से पता चला है कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के विलक्षण अपवाद के साथ, 2019 में पहली बार बीजेपी मतदाता का प्रोफाइल लगभग भारतीय समाज को दर्शाता है.
गंगा जल से मूर्ति को धोना आंबेडकर की लड़ाई को जीरो साबित करना है. मूर्ति धोने वालों ने यह बता दिया कि इस धरती पर अछूत तो रहेगा ही फिर चाहे वह प्रेमचंद का होरी हो या उसका नाम गिरिराज सिंह ही क्यों ना हो.
शिक्षा और समृद्धि को तलाक का कारण बताने वाले मोहन भागवत का बयान कई वजहों से समस्या पैदा करता है क्योंकि यह तलाक को एक बुराई और पाप की तरह भी प्रस्तुत करता है.
भारी तामझाम के साथ एक सौ करोड़ रुपये फूंककर ट्रम्प से केम छो (कैसे हैं आप) पूछने के लिए अपने बेबस नागरिकों से इतनी बेदिली से पेश आने को किसी भी तर्क से मानवीय या लोकतांत्रिक नहीं ठहराया जा सकता.
गुड्डू रंगीला के पास एक अद्भुत ताकत है कि वो हर भोजपुरी शब्द को सेक्सुलाइज कर सकते हैं. उनकी एक खासियत भी है कि वह एक ही समय में देशद्रोही और देशभक्त दोनों प्रतीत होते हैं.
चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा अपने-अपने घोषणा पत्रों में मतदाताओं को आकर्षित करने के लिये मुफ्त में सुविधायें देने या रेवड़िया बांटने का प्रलोभन देने की प्रवृत्ति से उच्चतम न्यायालय भी सहमत नहीं है.
दिल्ली में पुलिस व्यवस्था की शुरूआत करीब आठ सौ साल पुरानी मानी जाती है. तब दिल्ली की सुरक्षा और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी शहर कोतवाल पर हुआ करती थी.
पश्चिम बंगाल चुनाव में वामपंथी दल और कांग्रेस खुरचन में हिस्सेदारी के लिए होड़ लगा रहे हैं. पूर्वी-मध्य भारत में माओवाद को कब्र में दफन कर दिया गया है, तो केरल में वे सरकार विरोधी दोहरी भावना से जूझ रहे हैं.