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Friday, 24 April, 2026
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डब्लूएचओ में नेतृत्व की अपनी नयी भूमिका में भारत अपने साथियों को सत्ता संतुलन के नाम पर बरगला नहीं सकता

कोविड-19 को लेकर सत्ता संघर्ष अब नये रूपों में सामने आएगा, जिसकी अनदेखी करना भारत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है.

भारत कोरोना के बाद चीन के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की जगह ले सकता है, ये कहना जल्दबाजी होगी

#CutTheClutter के 467वें एपिसोड में शेखर गुप्त बता रहे हैं कि चीन के व्यापार में घुस पाना आसान नहीं लेकिन कुछ एरिया हैं, पर उसके लिए काफी मेहनत करनी होगी.

कश्मीरी फोटो पत्रकारों को मिले पुलित्जर से स्पष्ट हो जाता है कि मीडिया के एक वर्ग को ट्रंप समर्थक ‘लूगनप्रेस’ क्यों कहते हैं

पुलित्जर द्वारा कश्मीर को ‘स्वतंत्र’ बताने पर यकीन करना मुश्किल होता है क्योंकि क्षेत्र के राजनीतिक दर्जे की बात एक बुनियादी सामान्य ज्ञान है.

कोविड के समय हवाई सफ़र आवाजाही का सबसे सुरक्षित ज़रिया है, भारत इस सेक्टर में बड़ी उछाल ला सकता है

कोरोनावायरस के बाद की दुनिया में, जब सोशल डिस्टेंसिंग एक आम बात हो जाएगी, तो कच्चे तेल के सस्ते अंतर्राष्ट्रीय दामों की बदौलत, भारत के एविएशन सिस्टम में उछाल आने वाला है.

कैसे विकसित हुआ नया एंटीजन टेस्ट और कोरोना को हराने में एकजुट है दुनिया

अमेरिका ने एंटीजन टेस्ट को पास कर दिया है यह न केवल पांच मिनट में कोविड-19 संक्रमण का परिणाम देता है बल्कि यह पहले से चले आ रहे आरटीपीसीआर टेस्ट से काफी सस्ता भी है.

बांग्लादेश, चीन, वियतनाम की तरह भारत अपने श्रम कानून के सुधारों में सुरक्षा की जगह आय को प्रमुखता दे रहा है

श्रम बाज़ार में उदारीकरण से श्रमिकों के लिए रोज़गार के अवसर पैदा होते हैं. उदाहरण के लिए, भारत की एक औसत कपड़ा कंपनी में 240 कर्मचारी होते हैं, जबकि बांग्लादेश में करीब 800.

लिपुलेख पास से होकर कैलाश मानसरोवर के लिए नई सड़क तैयार, नेपाल क्यों कर रहा है इसका विरोध

#CutTheClutter के 466वें एपिसोड में शेखर गुप्ता कैलाश मानसरोवर और लिपुलेख पास को लेकर भारत और नेपाल के बीच भू-राजनीति के बारे में बता रहे हैं.

वाजपेयी के नेतृत्व में आरएसएस का जलवा था पर मोदी राज में उसकी धमक कम हो गयी है

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दबदबे का चाहे जो बखान किया जाता रहा हो, आज हकीकत यह है कि भाजपा का वैचारिक संरक्षक यह संगठन नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में हाशिये पर पड़ा दिख रहा है.

कोरोना के दौर में पेश हैं एक नए राहुल जो अर्थशास्त्रियों की ले रहे हैं सलाह, मज़दूरों के हक़ की मांग कर रहे हैं

रघुराम राजन और अभिजीत बनर्जी के साथ राहुल गांधी की बातचीत और साथ ही ज़ूम प्रेस वार्ताओं से साफ़ ज़ाहिर है, कि कांग्रेस लीडर अब वापसी के अंदाज़ में हैं.

सोशलिज्म के आदर्शलोक से नहीं, ‘श्रम कानून’ को उदार बनाने में है मजदूरों का हित

कोविड काल में पैदा हुई परिस्थिति को अवसर के रूप में भुनाते हुए रोजगार सृजन के लिए श्रम कानून की जटिलताओं में ढील देनी जरूरी थी. इसके लिए श्रम कानून के जिन प्रावधानों को निरस्त किया गया है, उससे ना तो लाखों मजदूरों को  पहले कोई कोई लाभ था और ना ही अब कोई हानि होनी है.

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दंतेवाड़ा के कलेक्टर ओपी चौधरी ने नक्सल-प्रभावित ज़िले में शिक्षा को कैसे बढ़ावा दिया?

तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.

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दिल्ली मेट्रो निर्माण स्थलों पर धूल प्रदूषण संबंधी शिकायतों में भारी कमी

(श्रुति भारद्वाज) नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) दिल्ली मेट्रो के निर्माण स्थलों और स्टेशन परिसरों से जुड़ी धूल प्रदूषण की शिकायतों में 2026 के...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.