दूसरे विश्व युद्ध में जर्मन सेना को कभी पराजय का सामना नहीं करना पड़ा क्योंकि उसकी दूसरी पंक्ति के कमांडरों में पूरा तालमेल था और वे उसकी रीढ़ की मजबूत हड्डी साबित हुए.
अतुलनीय संपत्ति की बर्बादी का यह सिलसिला ओड़िशा तक ही सीमित नहीं है. महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, नागालैंड– मणिपुर सीमा, यह एक लंबी सूची है.
राहुल गांधी ने एक बार फिर वही किया. कांग्रेस नेता ने आंतरिक राजनीति पर बेहद खराब असर डालने वाले कदम की कीमत पर भारत में किसी तरह का कोई दखल न रखने वाले विदेशी बुद्धिजीवियों का समर्थन और भरोसा हासिल करने की कोशिश की है.
अपने ही नागरिकों के खिलाफ बेहिसाब हिंसा की म्यांमार सेना की नीति अतीत में कारगर रही थी. तख्तापलट हुए अब दो महीने हो गए हैं लेकिन बड़े पैमाने पर जनप्रदर्शनों का सिलसिला जारी है.
पाकिस्तान के डीजी आईएसपीआर द्वारा इस्लामाबाद के रवैये में बदलाव का सार्वजनिक इजहार उत्साहजनक है, लेकिन पाकिस्तान को अपने नए रुख पर कायम रखने में अमेरिका और चीन दोनों के समर्थन की दरकार होगी.
राजनैतिक और चुनावी तौर पर काफी मजबूत स्थिति में होने के बावजूद भाजपा अपने तथाकथित साहसिक सुधारों को आगे नहीं बढ़ा पा रही है, क्योंकि ये जन-हितैषी नहीं है.
आज निरंतर बदलती विश्व व्यवस्था भारत के लिए एक मौका उपलब्ध करा रही है जिसका लाभ उठाने के लिए उसे खुद को अनुशासित रखना होगा ताकि पाकिस्तान जब अपने लिए मौका देख रहा है तब हम हड़बड़ी में कोई प्रतिक्रिया न कर बैठें.