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Thursday, 15 January, 2026
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मोदी सरकार पहली लहर की सफलता के मुगालते में रही, जबकि कोविड की दूसरी घातक लहर दस्तक दे रही थी

दुनिया जब कयामत की भविष्यवाणियों को झूठा साबित करने की भारत की कामयाबी से हैरत में थी, तब जाहिर है कि मोदी गर्व से फूले नहीं समा रहे थे.

भारत के पहले दलित होटल के मालिक एम नागलू, जो ब्रिटिश और अमेरिकी यात्रियों के बीच मशहूर थे

19वीं शताब्दी में एम नागलू गुमनामी से उठकर जानी-मानी शख्सियत बन गए. उनके पुत्र द्वारा लिखी उनकी बॉयोग्राफी संभवतः पहली दलित बॉयोग्राफी है जो अंग्रेजी में लिखी गई है.

मोदी सरकार ने कोविड संकट को मज़ाक बना दिया है, सही उपायों को अपनाने के लिए गंभीर होने का वक्त है

स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बहुत तेजी से बढ़ाने की जरूरत है. कई कंपनियां और बिजनेस सेक्टर पहले से ही बीमार हैं और अब नया झटका उन्हें गर्त में ही धकेल देगा.

कोविड की ‘खतरनाक’ तस्वीर साफ है, कोई मोदी सरकार को आइना तो दिखाए

कोरोना पर समय से पहले जीत जाने के ऐलान के साथ कुंभ मेले और चुनावों को मंजूरी देकर और वैक्सीन की जरूरत की अनदेखी करके मोदी सरकार ने अपने लिए सबसे बड़े संकट को बुलावा दे दिया है, अब हकीकत को पहचानने की विनम्रता, और कोई ‘रामबाण’ ही इस संकट से उबार सकता है.

भारत की दिक्कत ‘वैक्सीन मैत्री’ नहीं बल्कि कोविड के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र-राज्य के बीच तकरार है

जनसभाओं पर रोक लगाने और लोगों को अनुशासित करने के काम में अभी भी देर नहीं हुई है. लेकिन लोगों को अनुशासन का पाठ पढ़ाने से पहले सरकारों को खुद का उदाहरण पेश करने की जरूरत है.

खामी भरी सुरक्षा रणनीति के कारण कैसे असफल हो रही है माओवादी विद्रोह पर लगाम लगाने की कोशिश

छत्तीसगढ़ में ताजा माओवादी हिंसा ने हमारे सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण और उनकी रणनीतियों की खामियां फिर उजागर की. सवाल यह भी है कि हम नागा, मिज़ो और हुर्रियत जैसे अलगाववादियों से बातें कर चुके हैं. तो माओवादियों से क्यों नहीं बात की जा सकती?

कोरोना पर अपनी ‘नाकामियां छुपाने’ के लिए तब मरकज़ का सहारा लिया था, अब कुंभ पर क्या कहेगी मोदी सरकार

तीन करोड़ लोग अप्रैल में इस महाकुम्भ में हिस्सा लेंगे, उनमें कितने लोग पॉजिटिव होंगे और इतनी भीड़ वाले इलाके में वे कितने और लोगों को कोरोना फैलाएंगे.

जिबूती की कहानी हंबनटोटा से मिलती-जुलती है, और उसे भी चीन ने ही लिखा है

जिबूती के कतिपय प्रभावशाली लोगों को भरोसा है कि चीनी निवेश के सहारे उनका देश ‘अफ्रीका का सिंगापुर’ बन सकता है.

रैली हो या कुंभ- सियासत की खातिर कोविड को नज़रअंदाज करने का बोझ मोदी-शाह की अंतरात्मा पर हमेशा बना रहेगा

भाजपा के नेता जिस तरह बिना मास्क के विशाल रैलियां कर रहे हैं उससे यह भ्रम फैला है कि सब कुछ सामान्य है. लोगों में यह संदेश गया कि कोविड-19 का दुःस्वप्न तो बीती हुई बात हो चुकी है.

बहुसंख्यकों की तानाशाही लोकतंत्र के एकदम विपरीत, आंबेडकर का लिखा हमें फिर से पढ़ने की जरूरत

आंबेडकर मानते थे कि लोकतंत्र की पहली और सबसे जरूरी शर्त है कि बड़े पैमाने की गैर-बराबरी ना हो, हर नागरिक के साथ शासन-प्रशासन बराबरी का बर्ताव करता हो.

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निकाय चुनाव: नकदी बांटने के संदेह में उम्मीदवार के पति पर हमला करने के आरोप में छह लोग गिरफ्तार

नांदेड़, 14 जनवरी (भाषा) नांदेड़ में नगर निकाय चुनाव लड़ रही कांग्रेस उम्मीदवार के पति पर मतदाताओं को नकदी बांटने के संदेह में किये...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.