सुब्बाराव का जाना शांति की दिशा में अपने ढंग से प्रयासरत व्यक्तित्व का हमारे बीच से विदा होना है. उनसे जुड़ी अनेक स्मृतियां देशवासियों के मन को आलोकित करती रहेंगी.
मोहम्मद शमी या फैब इंडिया के लिए समर्थन की आवाज़ें इस हकीकत को दबा नहीं सकतीं कि आज भारत की हवा में जो जहर घुला हुआ दिख रहा है उसके लिए भाजपा के साथ-साथ विपक्षी दल भी जिम्मेदार हैं.
ब्रह्मपुत्र घाटी से लेकर पश्चिमी हिमालय और विंध्य के दक्षिण तक राजनीतिक तनाव की लहर पैदा करने वाले इन उपचुनावों के नतीजे दलों के भावी राजनीतिक समीकरण पर निश्चित ही असर डालेंगे.
दोनों समूह व्यवसाय जगत में नयी मजबूत पहल करने के लिए मशहूर हैं लेकिन दूसरे भी ऐसे हैं. ये दोनों अगर अलग दिखते हैं तो इसलिए कि उनमें अपना वर्चस्व बनाए रखने की भूख है.
क्रिप्टोकरेंसी ने सरकारों का चैन छीन लिया है. कारोबारी या बड़ी हस्तियां जो बिना टैक्स दिये अपना धन पनामा जैसे देशों में भेजते हैं, उनके लिए यह एक सुनहरा अवसर प्रदान करता है.
‘नार्कोटिक्स ड्रग्स ऐंड साइकोट्रोपिक सब्स्टेंसेज एक्ट’ नामक कठोर कानून उन लोगों के हाथ में थमा दिया गया है जो इसका दुरुपयोग कर सकते हैं. आज टीवी के परदे पर इसी खुल्लमखुल्ला दुरुपयोग की कहानी चल रही है.