मीडिया में लोगों के सोच को बदलने का रसूख रखने वालों ने शुरू में तो इमरान खान का समर्थन किया था मगर अब कबूल कर रहे हैं कि ‘सॉरी यार, गलती से मिस्टेक हो गई’
सावरकर ने बहुत सोच-समझकर अपनी राजनीतिक विचारधारा को हिन्दुत्व का नाम दिया, ताकि जब भी उसकी आलोचना की जाये, हिन्दुओं को लगे कि हिन्दू धर्म की आलोचना की जा रही है. वे यह न समझ सकें कि हिन्दुत्व वास्तव में हिन्दू धर्म का नहीं, हिन्दू राष्ट्रवाद का दस्तावेज है, जिसे किसी भी लोकतांत्रिक संविधान के तहत स्वीकार नहीं किया जा सकता.
स्टैंडअप कॉमेडियन वीर दास का कैनेडी सेंटर मोनोलॉग ‘टू इंडियाज’ 2014 से पहले की पुरानी यादों और उन बातों पर आधारित है जिन्हें हर उदारवादी की तरफ से जबरन दफना दिया गया है.
वायु-प्रदूषण या फिर जलवायु-परिवर्तन का मसला चाहे कितना भी गंभीर हो, यह आप से आप तो राजनीतिक मुद्दा बनने से रहा. इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना की मशक्कत करनी पड़ेगी.
भारत में ‘नायका’ नामक ब्युटी कंपनी की सफलता पर खुश होने के साथ हमें यह भी जानना चाहिए कि आज कितनी युवा महिलाएं रोजगार करने का फैसला कर सकती हैं या वाकई रोजगार कर सकती हैं
गृह मंत्री अमित शाह के लिए काम निश्चित हैं, लेकिन अगर वे उत्तर प्रदेश की राजनीति में उलझे हुए हैं तो इसकी वजह यह है कि भाजपा उन पर बहुत ज्यादा निर्भर है
मोदी के राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अफरातफरी 2014 के बाद से ही मची हुई है, और मोदी ने भारत के मुख्यमंत्रियों की महत्वाकांक्षा को पर लगा दिए हैं.
अमेरिका के लक्ष्य अधूरे रह गए, अब उसके पास न तो इतनी ताकत है और न इतना जोश है कि वह युद्ध फिर शुरू कर सके; और ईरान? घुटने टेकने की जगह वह पूरे संकल्प के साथ लड़ा. उसकी बागडोर अब ज्यादा कट्टरपंथी लोगों के हाथ में है