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Friday, 16 January, 2026
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आयुष सिन्हा का क्या दोष है? इसकी जड़ें नेताओं और नौकरशाहों के बीच सांठगांठ में है

शब्द तो खैर निंदा के योग्य थे ही, इससे भी ज्यादा चुभने वाली बल्कि कह लें अश्लीलता की हद को पहुंचती बात थी- एसडीएम की भाव-भंगिमा. इससे पता चलता है कि राजनेताओं और उनके चहेते नौकरशाहों के बीच गजब की सांठगांठ चलती है.

ओलंपिक गोल्ड विजेता नीरज और पैरालंपिक पदक विजेताओं को फोन करना मोदी के लिए सियासी मैदान में गोल्ड मेडल जीतने जैसा ही है

चुनावी सभाओं या लालकिले से भाषण से इतर भी लोगों से संवाद करके मोदी ने प्रधानमंत्री की ‘अलग-थलग’ वाली छवि को ध्वस्त करके उसे अलग ही आयाम प्रदान किया है.

US से NDA और सेना सीख सकती है कि फिटनेस को नजरअंदाज किए बिना मानकों को कैसे बदला जाए

सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के लिए एक नई राह खोली है. अब सैन्य नेतृत्व को लैंगिक न्याय और सेवा की अनिवार्यताओं का समर्थन करना चाहिए.

सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की दोस्ती क्या आपसी हितों के टकराव की चुनौती का हल निकाल पाएगी

विडंबना यह है कि कांग्रेस-मुक्त उत्तर-पूर्व में पैर फैलाने की ममता बनर्जी की कोशिश में चुनाव रणनीतिज्ञ प्रशांत किशोर मदद कर रहे हैं, जो राहुल गांधी के मित्र हैं.

राम मंदिर तक ही सीमित नहीं है VHP, सामाजिक समरसता इसके काम का मूल आधार

विहिप की स्थापना की पृष्ठभूमि और 1980 के दशक तक के उसके कामकाज को देखें तो पता चलता है कि भारतीय राजनीति में जिस सोशल इंजीनियरिंग की बात मंडल आयोग लागू होने के उपरांत 1990 के दशक में आरंभ हुई.

मोदी सरकार की 6 ट्रिलियन रु. की मौद्रीकरण योजना खतरों के बीच ख्वाब देखने जैसा क्यों है

पिछली भयानक गलतियों, अधूरे लक्ष्यों, कमजोरियों, और कलंकित पूंजी के स्पष्ट प्रभाव के मद्देनजर देश को एक और घपला ही हाथ लग सकता है.

अफगानिस्तान में गलत घोड़े पर दांव लगाने के बाद भारत की रणनीतिक पहल ठंडी पड़ी

अफगानिस्तान में भारत की पहल रणनीतिक विकल्पों के अभाव से ज्यादा कट्टरपंथी तालिबान और उसके गुरु पाकिस्तान की जीत से पैदा हुई खीज़ से उपजी है.

काबुल ने बाइडन को भेड़ की खाल में छुपा भेड़ साबित किया, यूरोप, भारत और क्वाड उनके रुख से हैरत में है

अफगानिस्तान पर जो बाइडन को देखने के बाद क्वाड क्या अमेरिकी सहयोगियों की फैंसी नौसेना परेड के अलावा कुछ है?

गेल ओमवेट ने सिर्फ ब्राह्मणवादी नजरिए की घुट्टी पी रहे विश्व समुदाय को जातियों के सच से अवगत कराया

ओमवेट बौद्धिक और सामाजिक मोर्चों पर सक्रिय उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती थीं, जो जाति आधारित उत्पीड़न से लड़ने के लिए विविध विचारधाराओं का उपयोग करती थी, वे बहुजन समाज की भरोसेमंद साथी थीं.

चाहे आप आरक्षण के पक्ष में हों या विपक्ष में- जाति जनगणना जरूरी है

अगर जाति जनगणना का समर्थन राजनीति है तो फिर इस जनगणना का बीजेपी का अभी का विरोध भी राजनीतिक है.

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निकाय चुनाव में जनता ने महायुति को मत दिया क्योंकि वह विकास और ईमानदारी चाहती है: फडणवीस

मुंबई, 16 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) सहित 29 महानगरपालिकाओं के चुनावों...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.