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Saturday, 25 April, 2026
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क्या हनुमान चालीसा का पाठ करना राजद्रोह की श्रेणी में आएगा

अटॉर्नी जनरल ने ही राजद्रोह कानून से संबंधित धारा 124 ए की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ करने पर राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तारी का उल्लेख किया.

औपनिवेशिक संस्कृति की गुलामी से उबरने के लिए ‘हिंदुत्व’ नहीं, देशज भाषा और दृष्टि जरूरी

क्या हम अब भी गुलाम हैं? साल जब हौले-हौले आजादी की 75वीं वर्षगांठ की तरफ कदम बढ़ा रहा है तो हमें अपने से यह सवाल जरूर पूछना चाहिए कि : क्या विचारों के मामले में हमने अपना स्वराज हासिल किया है?

देश में उभर रहा है नया ‘राजनीतिक विकल्प’ और यह सिर्फ BJP के लिए ही बुरी खबर नहीं है

भाजपा की पुरानी प्रतिद्वंद्वी देशभर में कमजोर होती जा रही है और उसकी जगह नयी, ज्यादा मुखर, ज्यादा लोकलुभावन और ज्यादा आक्रामक विपक्ष उभर रहा है.

बढ़ती महंगाई के बावजूद बहुत पहले क्यों नहीं बढ़ाई RBI ने प्रमुख ब्याज दरें? यह है वजह

आरबीआई की गलती खुदरा मुद्रास्फीति की दर 2% की छूट के साथ 4% पर रखने के अपने मैंडेट की व्याख्या से जुडी हो सकती है, क्योंकि यह मुद्रा स्फीति के 6% या उसके आस पास होने पर भी इसे कुछ भी न करने की अनुमति देती है.

भाजपा, AAP से लेकर प्रशांत किशोर तक: राजनीतिक सफर शुरू करने के लिए गांधी क्यों जरूरी

क्या महात्मा गांधी की राह पर चलना प्रशांत किशोर के लिए आसान होगा? क्या वैसा नैतिक बल और प्रतिबद्धता उनके अंदर है?

मुश्किल में भारत के ‘ऑफसेट’ रक्षा करार, सुधार की ज़रूरत है

अब तक जिन 57 ‘ऑफसेट’ करारों पर दस्तखत किए गए हैं उनमें जुर्माना ही भरना पड़ा है और इसमें और बढ़ोतरी होनी की ही उम्मीद है

‘इंडिया, आई लव यू’—लेकिन इस समय क्यों इमरान खान? कश्मीर से लेकर कोविड तक भारत एक अच्छी ढाल था

मोदीफोबिया से उबरने से लेकर ‘आजाद’ भारत की विदेश नीति की सराहना और भारतीयों को ‘स्वाभिमानी’ बताने तक, इमरान खान के यू-टर्न कुछ और नहीं उनके दोहरे चरित्र को दर्शाते हैं.

अगर भाजपा क्षेत्रीय पार्टी बनना चाहती है तो फिर वो देश में हिंदी को जरूर थोपे

भाजपा इस पुराने पड़ चुके भाषा विवाद को शायद ही फिर से भड़काना चाहेगी, आखिर अटल बिहारी वाजपेयी तक ने इसे खारिज कर दिया था.

मोदी ने 8 साल पहले भारतीय सेना को बदलने का वादा किया था लेकिन अभी तक अधर में है योजना

सेना में अपने आपमें परिपूर्ण कई सुधारों की योजनाएं बनीं लेकिन पता नहीं किन अज्ञात कारणों से उन्हें लागू नहीं किया गया.

हिंदी यूं ही लोकप्रिय नहीं, काफी सरकारी जोर-आजमाइश हुई है

आजादी के बाद हिंदी का जो विकास हुआ, वह पूरी तरह स्वाभाविक नहीं है. हिंदी आज अगर पहले से ज्यादा लोकप्रिय नजर आ रही है, तो इसमें सरकार का पैसा और प्रयास लगा है.

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राइटिंग्स ऑन दि वॉल—नक्सलबाड़ी की क्रांति से ‘विनर्स’ तक: बंगाल की नई इबारत

पश्चिम बंगाल चुनाव में वामपंथी दल और कांग्रेस खुरचन में हिस्सेदारी के लिए होड़ लगा रहे हैं. पूर्वी-मध्य भारत में माओवाद को कब्र में दफन कर दिया गया है, तो केरल में वे सरकार विरोधी दोहरी भावना से जूझ रहे हैं.

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दिल्ली: 31 साल पुराने अपहरण-हत्या मामले में यूट्यूबर गिरफ्तार, पहचान बदल कर रह रहा था आरोपी

दिल्ली, 25 अप्रैल (भाषा) दिल्ली पुलिस ने 31 साल पुराने अपहरण ‍‍‍‍‍व हत्या के एक मामले के सिलसिले में स्थानीय स्तर पर एक सामाजिक...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.