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Thursday, 5 March, 2026
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दिल्ली विश्वविद्यालय के 100 साल: इबारत और इबादत की जगह को कट्टरता से बचाने की ज़रूरत

दिल्ली विश्वविद्यालय को अपने शताब्दी वर्ष में ठहर कर सबसे ज्यादा इस बात को सोचने की जरूरत है कि आने वाला वक्त विश्वविद्यालय को किस ओर ले जाएगा?

साफ बताइए कि ‘आत्मनिर्भरता’ से आपका क्या मतलब है और आप यह क्यों चाहते हैं

भारत के लिए व्यापार घाटे से बड़ी समस्या है रोजगार घाटा. रणनीतिक आत्मनिर्भरता की तलाश में इस समस्या की, और व्यावहारिकता के मसले की अनदेखी नहीं होनी चाहिए.

मोदी सरकार विरोधियों के खिलाफ यूज़ कर रही ‘Triple Weapon’ पॉलिसी, तो देश में उभर रहा नया MAD सिद्धांत

केंद्र सरकार अगर अपने विरोधियों को धमकाने, जेल में भेजने के लिए अपनी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है, तो गैर-भाजपाई मुख्यमंत्रियों ने इसी तरह से प्रतिकार करने का जो तरीका चुना है वह आगे और तीखा रूप ले सकता है 

रोजगार का अधिकार हासिल करने के लिए आंदोलन जरूरी है

सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार, 6 करोड़ भारतीयों ने काम की तलाश बंद कर दी है क्योंकि उन्हें कोई अवसर नजर आ नहीं रहा है. यह एक बुरी खबर है.

ट्विटर एक शोरशराबे वाले मंच से ज्यादा कुछ नहीं, बीजेपी ये अच्छे से जानती है लेकिन पत्रकार नहीं

ट्विटर के मामले में पत्रकार कांग्रेस जैसे ही हैं, हम झगड़ों और ट्रोल को असली राजनीति मान लेने की गलती कर बैठते हैं.

रक्षा PRO’S का कदम अच्छा संकेत नहीं, सेना के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को दक्षिणपंथियों से बचाना जरूरी

जम्मू रक्षा पीआरओ की हरकत पर कोई कार्रवाई न करना सिर्फ कायरता नहीं, बल्कि यह भी जाहिर करता है कि सशस्त्र बलों का भी तेजी से राजनीतिकरण हो रहा है.

‘खून के धब्बे धुलेंगे कितनी बरसातों के बाद’- राजनीतिक सत्ता में बैठे हुक्मरानों को फैज़ से डर क्यों

अभी तीन साल पहले 2019 में नरेंद्र मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून बनाकर देशवासियों का विरोध मोल लिया और उसके खिलाफ जगह-जगह विरोध प्रदर्शन व आन्दोलन शुरू हो गये, तो फैज की प्रसिद्ध नज्म ‘हम देखेंगे’ उनका सबसे प्रिय हथियार बन गई.

इमरान के रूप में जो प्रयोग किया गया वह नाकाम रहा, अब बाजवा को फौज के भीतर से ही चुनौती मिल सकती है

पाकिस्तान में अब तक जो सरकारें बर्खास्त की गईं उन्हें भ्रष्ट बताकर कोसा जाता रहा है लेकिन इस बार मामला ज्यादा गंभीर है क्योंकि इमरान जो कचरा छोड़ गए हैं उसे साफ करना मुश्किल है.

भारतीय सेना का बहुसंस्कृतिवाद हमेशा एक मुद्दा रहा है, सेना के इफ्तार ट्वीट पर विवाद क्यों एक चेतावनी है

सेना हमेशा अपने सैनिकों की धार्मिक परंपराओं का सम्मान करने पर गर्व करती रही है लेकिन सांप्रदायिक पूर्वाग्रह एक नए खतरनाक मोड़ पर पहुंचने लगा है.

वह दिन दूर नहीं जब नदियों और समुद्र में मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक तैरता नजर आएगा

2050 तक 821 मिलियन मेट्रिक टन प्लास्टिक कचरा नदी और समुद्रों में जमा हो जाएगा और 850 मेट्रिक टन माइक्रोप्लास्टिक हमारी नालियों, नदियों और समुद्र में घुल जाएगा. यानी मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक तैरता नजर आएगा.

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अरुणाचल प्रदेश: उपमुख्यमंत्री ने विकास को गति देने में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना की

ईटानगर, पांच मार्च (भाषा) अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चोवना मेन ने बृहस्पतिवार को असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने में प्रधानमंत्री...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.