सेना सरकार के ‘वस्तुनिष्ठ नियंत्रण’ में है, जो उसे हमेशा स्वायत्तता देती रही है लेकिन या तो सेना ने सरकार को ‘औपनिवेशिक’ प्रतीकों के मामले में तार्किक सलाह नहीं दी या वह अपनी मर्जी से उसकी राजनीतिक विचारधारा से जुड़ गई.
इतिहास के इस मुकाम पर हम अपने आपस के झगड़ों में उलझे नहीं रह सकते. पॉल सैम्युल्सन की तर्ज पर मैं भी सबसे पूछना चाहता हूं, ' जब स्थिति बदलती है तो मैं अपना आकलन बदल लेता हूं लेकिन आप क्या करते हैं, जनाब?'
पीएफआई इस्लामवाद के जिस नफरती चेहरे को सामने लाता है, उससे साफ है कि गहराई से जड़ें जमाए राजनीतिक और सामाजिक समस्याओं ने कितना जटिल रूप ले लिया है. इससे निपटने के लिए सिर्फ पुलिसिया कार्रवाई ही नहीं, बल्कि राजनीतिक एक्शन की भी जरूरत है.
ईस्ट हैम और वाथम फॉरेस्ट निवासी पाकिस्तानी पंजाबी हैं, ल्यूटन में अधिकांश कश्मीरी मुस्लिम बसे है, वहीं साउथहॉल पंजाबी सिख और टॉवर हैमलेट बांग्लादेशियों का इलाका है. हर समुदाय ने अन्य आप्रवासियों से दूरी बनाए रखने के लिए अपने क्षेत्र की एक सीमा रेखा खींच रखी है.
जिन कारणों से कांग्रेस ने भारत जोड़ो पदयात्रा की आवश्यकता महसूस की उन्हें उसने अधिकृत रूप से तीन बिंदुओं के अंतर्गत रखा है. पहला, अर्थव्यवस्था का विनाश. दूसरा, राजनीतिक केंद्रीयकरण और तीसरा सामाजिक ध्रुवीकरण.
यह मान लेना भूल होगी कि सेना उत्तर-पूर्व में बगावत विरोधी कार्रवाई की ज़िम्मेदारी से पूरी तरह मुक्त हो गई है और असम राइफल्स के महानिदेशक ने इसकी पूरी ज़िम्मेदारी संभाल ली है
राहुल गांधी को छोड़ अधिकतर विपक्षी नेता इस सच्चाई को कबूल कर चुके हैं कि नरेंद्र मोदी पर हमले करने से वोट नहीं मिलने वाला है; इसलिए सबने अपना-अपना उपाय खोज लिया है.
अमेरिका स्थित फेथ एंड मीडिया इनिशिएटिव के सीईओ, जिनसे पूर्व में पीएम मोदी और राहुल गांधी भी सलाह ले चुके हैं, ने दिप्रिंट से आस्था और धर्म पर उनकी संस्था द्वारा करवाए गए सर्वेक्षण के निष्कर्षों के बारे में विशेष रूप से बातचीत की.