नितिन नबीन की नियुक्ति दिखाती है कि बीजेपी भी अन्य राजनीतिक दलों की तरह है, जहां पार्टी के बड़े नेता चुनाव प्रक्रिया को सख्ती से नियंत्रित करके संगठन के प्रमुख का फैसला करते हैं.
यह जनगणना अलग-अलग जाति समूहों की संख्या और उनकी आय—दोनों का नक्शा तैयार करेगी. इससे उन लोगों को आधार मिलेगा, जो एससी/एसटी आरक्षण से ‘क्रीमी लेयर’ को बाहर करने की मांग करते हैं.
यह समझने के लिए कि 1971 को भारत की संसदीय सीटों का आधार क्यों बनाया गया, 1960 के दशक के उस माल्थसवादी डर को फिर से देखना होगा, जो विकास से जुड़ी सोच पर हावी था.
मुझे उम्मीद है कि ईरान में भारतीय छात्र सुरक्षित घर लौट आएंगे. उन्होंने घर और विदेश में बहुत दुख झेला है. लेकिन एक ऐसा कल्चर जो 2026 में सिर्फ़ दो प्रोफेशन को ही स्वीकार करता है, वह इससे कुछ नहीं सीखेगा. अगली निकासी में मिलते हैं.
बीजेपी-संघ परिवार की बंगाल विरोधी सोच का सबसे साफ उदाहरण उसके नेताओं द्वारा ममता बनर्जी के खिलाफ इस्तेमाल की गई बेहद पितृसत्तात्मक और महिला-विरोधी भाषा है.
बड़ा सवाल यह है कि नितिन नबीन RSS के साथ कितनी सक्रियता से जुड़ेंगे. संघ को उनका नाम एक तय फैसले के तौर पर बताया गया—पुष्टि के लिए नहीं, सिर्फ जानकारी के लिए.
अमेरिका के लक्ष्य अधूरे रह गए, अब उसके पास न तो इतनी ताकत है और न इतना जोश है कि वह युद्ध फिर शुरू कर सके; और ईरान? घुटने टेकने की जगह वह पूरे संकल्प के साथ लड़ा. उसकी बागडोर अब ज्यादा कट्टरपंथी लोगों के हाथ में है