गुजरात के मामले में रणनीतिक जोखिम और बढ़ने ही वाला है क्योंकि पड़ोसी पाकिस्तान चीन की मदद से ज्यादा दूर तक मार करने वाले आग्नेयास्त्र हासिल करने जा रहा है.
भारतीय नागरिक समाज अपने बुनियादी अस्तित्व संबंधी मुद्दों से जूझने और अपने राष्ट्रवाद को साबित करने में पहले से ही इतना व्यस्त है कि यह सत्ता के सामने सच बोलने में सक्षम हो नहीं हो पा रहा है.
छह राज्यों में 3 नवंबर के उपचुनाव पहली नजर में राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से महत्वहीन लग सकते हैं. लेकिन इन्हें भाजपा की राजनीतिक बिसात पर रखकर देखेंगे तो समझ आएगा कि पार्टी के लिए इनके क्या मायने हैं.
पूर्वी एशिया की तुलना में भारत का सरकारी क्षेत्र जीडीपी के हिसाब से बड़ा है. फिर भी, हर मामले में हमारी सार्वजनिक सेवाएं खराब स्तर की हैं. यह जांचना भी बेहतर होगा कि हमारी सरकारें वास्तव में क्या प्रदर्शन कर रही हैं और किस कीमत पर.
मस्क ने इस बात के संकेत जरूर दिए हैं कि वह चाहते हैं कि ट्विटर पर सिटीजन जर्नलिज्म फले- फूले और स्थानीय समाचार माध्यमों को और अधिक प्रमुखता मिलनी चाहिए.