तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.
त्रिशूर में पटाखों की एक अस्थायी इकाई में हुए धमाकों में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई है, जबकि इतने ही अन्य घायल हुए हैं. सुरक्षा में चूक, गर्मी और त्योहारों के दौरान पटाखों की मांग, ये सभी पहलू अब चर्चा के केंद्र में हैं.