चश्मदीदों ने बताया कि अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ़ पर हमला करने वालों ने अंधाधुंध गोलियां चलाने के बाद भागे नहीं बल्कि इसके बजाय पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. साथ ही उन्होंने ‘जय श्री राम’ के नारे भी लगाए.
अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या का संज्ञान लेते हुए गृह मंत्रालय ने पत्रकारों की सुरक्षा के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने का फैसला किया है.
वेलामा (जमींदार) समुदाय से ताल्लुक रखने वाले केसीआर ने अपने भाषण में कहा था कि सचिवालय आने वाले हर मंत्री को अंबेडकर की प्रतिमा देखनी चाहिए और उनके सिद्धांतों को लागू करने के बारे में सोचना चाहिए.
तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.