लखनऊ समेत पूरे यूपी भर के तमाम शहर बेड, दवाओं और मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति की कमी से जूझ रहे हैं और इसकी वजह से निजी अस्पतालों को तीमारदारों से अपने मरीज कहीं और ले जाने को कहना पड़ रहा है.
सिसोदिया ने कहा, ‘मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि केन्द्र सरकार द्वारा दिल्ली को मिला ऑक्सीजन का कोटा बिना देरी के गंतव्य पर पहुंचना सुनिश्चित करें ताकि मरीजों की जीवन रक्षा की जा सके.’
आदेश के अनुसार, शहरों में बिना किसी समय सीमा की पाबंदी के ऑक्सीजन परिवहन में शामिल वाहनों के आने-जाने की आजादी होनी चाहिए और उन्हें बिना किसी रोक-टोक के शहरों के बीच आवाजाही करने दी जाए.
केजरीवाल ने कोविड-19 मरीजों के उपचार के लिए दिल्ली को ऑक्सीजन का कोटा बढ़ाने को लेकर केंद्र और उच्च न्यायालय के प्रयासों की सराहना की और कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में आपूर्ति पहुंचने लगी है.
क्यों अमेरिका ने खास मैटेरियल को लेकर घरेलू मांग को प्राथमिकता दी- जो अमेरिका में बने हैं या जिसकी पैरेंट फर्म वहां की है और यह भारत के लिए उपलब्ध नहीं.
नगर निगमों के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में 20 अप्रैल तक 15,161 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं. लेकिन सरकार ने ये संख्या 12,638 बताई है- मौतों में 2,523 का अंतर है.
अगर सरकार टैक्सपेयर्स का पैसा देश को बेहतर बनाने में खर्च करना चाहती है, तो ज्यादा अदालतें बनाए, टूटती हुई नौकरशाही को सुधारे, लेकिन, ज़ाहिर है, नेता सिर्फ अपने बारे में सोचेंगे.