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Saturday, 11 April, 2026
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अनुशासन, प्लेसमेंट और दबाव: चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने टॉप रैंकिंग में कैसे बनाई जगह

रैंकिंग, रिकॉर्ड प्लेसमेंट और सख्त नियमों ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी को भारत की टॉप रैंक प्राइवेट यूनिवर्सिटी बना दिया.

हड़ताल, हिंसा और राष्ट्रीयकरण: कैसे खत्म हुआ कानपुर का गौरवशाली कपड़ा उद्योग

कानपुर की गिरावट के लिए किसे दोषी ठहराया जाए, इस पर सब सहमत नहीं हैं. यहां तक ​​कि RSS समर्थित ट्रेड यूनियन भी 1970 और 1980 के दशक के हड़ताली मज़दूरों को दोष देने में जल्दबाजी नहीं करते.

कोलकाता का प्रिया सिनेमा भद्रलोक का गढ़ है. सत्यजीत रे से लेकर ‘धुरंधर’ तक, हर शो हाउसफुल

बंगाल के 700 सिंगल-स्क्रीन सिनेमाघर घटकर 130 रह गए हैं, लेकिन दक्षिण कोलकाता का प्रिया सिनेमा आज भी हाउसफुल दर्शक खींच रहा है. ‘हमने दशकों से खुद को मार्केट और पोजिशन किया है.’

कर्ज़ ने बिहार की महिलाओं को जकड़ लिया है. माइक्रोफाइनेंस कंपनियां नए दौर की साहूकार बन गईं हैं

बिहार में कभी लोगों के लिए मददगार रहीं माइक्रोफाइनेंस कंपनियां अब कर्ज का जाल बन गई हैं, जो परिवारों को उन्हीं कर्जों में फंसा रही हैं जो उन्हें गरीबी से बचाने के लिए दिए गए थे.

पुरानी दिल्ली का डिलाइट सिनेमा गोलचा, जुबिली और नोवेल्टी से ज्यादा समय तक कैसे टिका रहा

रायज़ादा परिवार ने नेहरू युग से ही पुरानी दिल्ली में सिंगल-स्क्रीन सिनेमा देखने के कल्चर को ज़िंदा रखा है. डिलाइट सिनेमा में आज भी कैश रजिस्टर बज रहे हैं.

ग्लिटर, तिलक और जय श्रीराम — कैसा रहा दिल्ली का सबसे बड़ा भजन क्लबिंग इवेंट

दिल्ली का ‘सबसे बड़ा भजन क्लबिंग इवेंट’ जिसे करीब 5,000 लोगों ने अटेंड किया, जिनमें से कई अपनी बीस की उम्र में थे.

स्थानीय चर्च से राष्ट्रपति भवन और अंबानी के एंटीलिया तक — 9 साल की मिजोरम की गायिका का सफर

9 साल की एस्थर हनामते को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार जीतने के बाद उनके मिजोरम के गांव में हीरो जैसा स्वागत मिला. अब अंबानी परिवार ने उन्हें बुलाया है — ‘हम मुंबई जा रहे हैं.’

मल्टीप्लेक्स के दौर में भी बॉलीवुड का फेवरेट क्यों है राजमंदिर? जयपुर का सिंगल-स्क्रीन जो आज भी मिसाल है

अमिताभ बच्चन और राज कपूर से लेकर विक्की कौशल तक, सभी ने राजमंदिर सिनेमा की बालकनी से हाथ हिलाया है. मिनर्वा और गोलचा जैसे दूसरे सिंगल-स्क्रीन बंद हो चुके हैं, लेकिन राजमंदिर आज भी सिंगल-स्क्रीन कल्चर को ज़िंदा रखे हुए है.

भारत में एक बार फिर से गजेटियर बनाने की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन क्या हैं इसके मायने?

जबकि ब्रिटिश गजेटियर ज़्यादातर एडमिनिस्ट्रेशन और रेवेन्यू पर फोकस करते थे, नई एक्सरसाइज का मकसद कल्चर, सोशल चेंज और डेमोक्रेटिक लाइफ का लाइव रिकॉर्ड बनाना है. यह एक मुश्किल काम है.

भारत में न्यू ईयर ईव पर 9,400 लोगों ने की खिचड़ी ऑर्डर

खिचड़ी ही अकेला कम्फर्ट फूड नहीं था. करीब 4,244 लोगों ने उपमा ऑर्डर किया, जबकि बेंगलुरु में 1,927 लोगों ने सलाद चुना.

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डीयूएसआईबी बैठक में अटल कैंटीन के समय में संशोधन, झुग्गीवासियों के लिए 717 फ्लैट आवंटित

नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को घोषणा की कि राष्ट्रीय राजधानी में अटल कैंटीन में अब दोपहर...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.