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Friday, 17 April, 2026
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समाज-संस्कृति

2020 में लोक नाट्य कलाकारों का दर्द, बोले- बिना पैसे के जिंदगी बन गई है तमाशा

तमाशा मराठी की एक अद्भुत लोक नाट्य विधा है जिसे कोरोना के समय भी जिंदा रहना चाहिए. लेकिन, जमीनी कलाकारों को मौजूदा संकट से बाहर निकालने के लिए कहीं कोई कुछ खास कोशिश नहीं हो रही है.

‘हर चीज इडियट-प्रूफ बनानी पड़ती है’—गुलजार ने कहा अब कला पर भय का माहौल हावी है

दिप्रिंट के ऑफ द कफ में, गुलज़ार ने अपनी नई किताब ' अ पोएम अ डे ' के बारे में बात की, जो भारत की 34 भाषाओं में 279 कवियों द्वारा 365 कविताओं का एक संकलन है.

शम्सुर्रहमान फारूकी- उर्दू की सबसे रौशन मीनार

शम्सुर्रहमान फारूकी की शख्सियत, उनके काम, लेखनी और साहित्यिक दुनिया में उनके मकां को समझने के लिए दिप्रिंट ने मशहूर दास्तांगो हिमांशु बाजपेयी से बात की.

उर्दू साहित्य के सम्मानित कथाकार और आलोचक शम्सुर्रहमान फारूकी का निधन

1960 के दशक में उन्होंने लिखना शुरू किया था. उनकी चर्चित रचनाओं में कई चांद थे सर-ए-आसमां, मीर तकी मीर, गालिब अफसाने की हिमायत में, द सेक्रेट मिरर शामिल है.

भारतीय बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े संकट के पीछे की अनकही कहानी – पांडेमोनियम

भारतीय बैंकिंग की मौजूदा संरचना और उससे जुड़े हुए अन्य मुद्दे , बैंकिंग से समबन्धित विकास को अवरुद्ध करता रहा है. खराब ऋण बैलेंस शीट के साथ NPA भारतीय बैंकों की संभावनाओं को नीचे खींच रही हैं. पुस्तक में भारतीय अर्थव्यवस्था की सच्ची तस्वीर को चित्रित की गई है.

‘मंगलेश को मंगलेश ही रहने दो देवत्व न दो’

पिछले पांच-सात बरस से मंगलेश प्रायः ‘अवसाद’ की कविताएं लिखने लगा था फिर उसकी कविता में क्रोध के चिन्ह भी नज़र आने लगे जो उसकी कविता के मिजाज के विपरीत थे.

कथक और कथकली को मिला कर अनूठी नृत्य शैली पेश करने वाले मशहूर डांसर अस्ताद देबू का निधन

नृत्य के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें 1995 में ‘संगीत नाटक अकादमी’ पुरस्कार दिया गया था. वह 2007 में ‘पद्मश्री’ से भी सम्मानित किए गए.

मानवाधिकार दिवस: उमेश, फरहीन और उषा के प्रयास मजबूर करते हैं उनकी अनकही दास्तां सुनने को

इस मानवाधिकार दिवस पर आभार और गर्व के साथ उमेश गुप्ता, फरहीन और उषा दुबे जैसों के प्रयासों को पहचाना जाना ज़रूरी है.

वरिष्ठ कवि और लेखक मंगलेश डबराल का निधन, पिछले कुछ दिनों से कोविड से थे संक्रमित

वरिष्ठ कवि और लेखक मंगलेश डबराल का बुधवार शाम को निधन हो गया. वे 72 वर्ष के थे. कोविड से संक्रमित होने के बाद उनका इलाज गाजियाबाद के ही एक अस्पताल में चल रहा था.

‘एक चिड़िया, अनेक चिड़िया’, 1974 का एनीमेशन गीत जो विविधता में एकता का संदेश देता है

इस फिल्म की पटकथा और निर्देशन डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता विजया मुले द्वारा और निर्माण एनिमेटर भीम सेन द्वारा किया गया था.

मत-विमत

नक्सलवाद से पश्चिम बंगाल की लड़ाई पुलिस एक्शन तक ही सीमित नहीं थी

मुझे लिखित संदेश मिला कि कानू सान्याल अपना ‘प्रतिनिधिमंडल’ मेरे पास भेजना चाहते हैं. उम्मीद की जा रही थी कि अपने उग्र समर्थकों के साथ आ रहे दुबले-पतले गुस्सैल बूढ़े आदमी के साथ बेहद तीखी मुठभेड़ होगी.

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मप्र: सिंगरौली में नकाबपोशों ने दिनदहाड़े बैंक से लूट लिए 14 लाख रुपये

सिंगरौली, 17 अप्रैल (भाषा) मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में शुक्रवार को नकाबपोश बदमाशों के एक गिरोह ने हथियारों के बल पर एक सरकारी बैंक...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.