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Wednesday, 22 April, 2026
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मत-विमत

शेख हसीना की जीत एशियाई शक्ति बनने में भारत के लिए मददगार होगी

बांग्लादेश में एक मज़बूत राजनीतिक ताक़त की मौजूदगी भारत के लिए बढ़िया है, ख़ास कर जब उसकी कमान नई दिल्ली से सहयोग करने वाली एक व्यक्ति के हाथों में हो.

क्या नीतीश कुमार का इकबाल खत्म हो गया है!

बिहार के मुख्यमंत्री के भाषणों में ही नहीं, बिहार में भी ‘सुशासन’ गायब है. वहां मॉब लिंचिंग की घटनाएं बढ़ रही हैं. अब वे सुशासन का नाम लेने से बचते हैं.

मौजूदा सरकार नहीं बना पाएगी तीन तलाक का कानून

बीजेपी सहमति से ही तलाक का कानून पारित करा सकती थी, लेकिन अपने अहंकार से उसने ये रास्ता नहीं चुना. मुस्लिम महिलाओं के लिए न्याय का कानून नहीं बन पाएगा.

पुरुष भी हैं पितृसत्ता के शिकार, तेज प्रताप यादव से पूछकर देखिए

पितृसत्ता पुरुषों द्वारा महिलाओं के साथ किया जाने वाला व्यवहार भर नहीं है. पितृसत्ता वह व्यवहार है जो समाज हम सबके साथ करता है, पुरुष और महिला दोनों के साथ.

राफेल घोटाला मोदी का बोफोर्स नहीं है

फेल को लेकर विपक्ष के प्रचार में कई सीमाएं हैं- न कोई वीपी सिंह है, न कोई पुख्ता कहानी है, न सबूत, न ही कोई नारा.

झारखंड में महागठबंधन का केंद्र बनने की कोशिश न करे कांग्रेस

कोलेबिरा उपचुनाव में जीत का ज्यादा मतलब निकालना कांग्रेस को महंगा पड़ सकता है. झारखंड में आदिवासियों की प्रतिनिधि पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा ही है.

भारतीय अर्थव्यवस्था को इकॉनॉर्मिक्स की ज़रूरत, न कि वामपंथ बनाम दक्षिणपंथ

हाल-फिलहाल मेरी नज़र से एक दस्तावेज़ गुज़रा और मन उसी पर अटक गया- लगा कि इसे तो मैं एक वक्त से खोज रहा था. यहां सुविधा के लिए हम उस दस्तावेज़ का नाम ‘इको-नॉर्मिक्स’ रख लेते हैं.

येरुशलम में मैंने अयोध्या का प्रतिबिंब देखा

येरुशलम की पश्चिमी दीवार (वेस्टर्न वॉल) और उत्तर प्रदेश के अयोध्या में काफी साम्य है. जैसा कि सावरकर मानते थे, यहूदीवाद और हिंदुत्व में अनेक प्रतीकात्मक समानताएं हैं.

कौन हैं अनुप्रिया पटेल, जिनकी नाराज़गी के आजकल चर्चे हैं?

अनुप्रिया पटेल यूपी में एनडीए का कुर्मी चेहरा हैं, लेकिन सरकार में आने के बाद से उनकी सामाजिक न्याय की योद्धा वाली छवि धूमिल हुई है. अब वे क्या करेंगी?

स्त्री की कोख का सहारा लेने वाले देवता को स्त्रियों से डर क्यों लगता है?

माहवारी वाली स्त्रियां अगर छू लें तो क्या अयप्पा को दिक्कत होगी? नहीं, उनके एजेंट, जो किसी स्त्री के ही कोख से पैदा हुए हैं, उन्हें बड़ी दिक्कतें हैं.

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अमेरिका अब तक ईरान को क्यों नहीं हरा पाया? क्योंकि ट्रंप कम खर्च में जीत हासिल करना चाहते हैं

ट्रंप का ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने का लक्ष्य, ईरान में इस्लामी शासन को गिराए बिना पूरा नहीं किया जा सकता, और यह काम ज़मीनी सैन्य आक्रमण (ग्राउंड इनवेज़न) के बिना संभव नहीं लगता.

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अलीगढ़ में निर्माणाधीन घर में मिला कारोबारी का शव, दो लोग हिरासत में लिये गये

अलीगढ़ (उप्र), 21 अप्रैल (भाषा) अलीगढ़ जिले के क्वार्सी क्षेत्र में मंगलवार शाम को एक गांव में एक निर्माणाधीन घर से एक स्थानीय...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.